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कबीर दास एक समाज सुधारक: कबीरयुग व वैचारिक दोहे | Saint Kabir Das Biography in Hindi, Education, Teachings, Poems, Dohe, Chaupaye, Thoughts, Ideas, Ideology and other Facts in Hindi by Piyadassi pdf download.
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कबीर दास एक समाज सुधारक: कबीरयुग व वैचारिक दोहे

संत कबीर दास जी का जीवन परिचय (Biography of Saint Kabir Das in Hindi): कबीर दास (1398-1518) हिंदी साहित्य के महान कवि और संत थे. अनुमानतः उनका जन्म 1398 ई. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. उनका पालन-पोषण एक जुलाहा दंपत्ति, नीरू और नीमा ने किया था. कुछ विद्वान उन्हें मुस्लिम जुलाहा मानते हैं, […]

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दल-बदल के कानून, राजनीति, कारण, राजनीतिक प्रभाव व चुनौतियाँ | Anti-defection law, politics, reasons, political impact and challenges by Piyadassi
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दल-बदल के कानून, राजनीति, कारण, राजनीतिक प्रभाव व चुनौतियाँ

दल-बदल का आशय (Meaning of Defection) — राजनीतिक दल-बदल का अर्थ राजनीतिक निष्ठा में परिवर्तन है. सुभाष कश्यप के अनुसार, “किसी विधायक का अपने दल अथवा निर्दलीय मंच का परित्याग कर किसी अन्य दल में जा मिलना, नया दल बना लेना या निर्दलीय स्थिति अपना लेना अथवा अपने दल की सदस्यता त्यागे बिना ही बुनियादी

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भारतीय समाज में विविधता में एकता के प्रकार, सादृढ़ीकरण, महत्व व चुनौतियाँ | Unity in Diversity of Indian Culture Explained in Hindi by Piyadassi.
Civics

भारतीय संस्कृति में विविधता में एकता के प्रकार, सदृढ़ीकरण, महत्व व चुनौतियाँ

भारतीय संस्कृति व समाज की विशिष्ट या अनन्य विशेषता विविधता में एकता है. उसकी एक विशेषता ने ही इसे अनन्त काल से अब तक जीवित रखा है. भारत में प्रजाति, धर्म, संस्कृति एवं भाषा की दृष्टि से अनेक भिन्नतायें पाई जाती है. इन मिन्नताओं के होते हुए भी सम्पूर्ण राष्ट्र में एकता के दर्शन होते

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राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का अर्थ, महत्व व अन्य तथ्य | Meaning, importance and other facts of the Directive Principles of State Policy by Piyadassi
Civics

राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का अर्थ, महत्व व अन्य तथ्य

भारतीय संविधान द्वारा जो मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) नागरिक को प्राप्त हुए हैं, वे बहुत कम हैं और वे पर्याप्त विस्तृत भी नहीं हैं. उनमें कुछ और अधिकार सम्मिलित किये जाने चाहिये थे. इसी अभाव की पूर्ति के लिये भारत के संविधान में राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का समावेश किया गया. यह भारत के संविधान

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मिड-डे मील योजना (पीएम पोषण योजना) का स्वरूप व उद्देश्य
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मिड-डे मील योजना (पीएम पोषण योजना) का स्वरूप व उद्देश्य

आजादी के बाद भारत में शैक्षणिक पिछड़ेपन को महसूस किया गया. इसी लिए समय-समय में कई सुधार कार्यक्रम लागू किए गए. इन्हीं सुधार कार्यक्रमों में से एक मिड-डे मील योजना भी है. मिड-डे मील योजना को अब प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM POSHAN) के नाम से जाना जाता है. इसका उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त

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VVIP सुरक्षा के विभिन्न स्तर: SPG, NSG, Z+,Z, Y+, Y और X
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VVIP सुरक्षा के विभिन्न स्तर: SPG, NSG, Z+,Z, Y+, Y और X

भारत में प्रमुख व्यक्तियों की सुरक्षा एक बहु-स्तरीय और व्यवस्थित ढाँचा है, जो आंतरिक व बाहरी सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है. VVIP सुरक्षा में विभिन्न श्रेणियां—एसपीजी, Z+, Z, Y+, Y और X—खतरे के स्तर के आकलन के आधार पर दी जाती हैं, जिसका मूल्यांकन इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर गृह

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भारत में पुतली कला: पटकथा, विशेषता, क्षेत्र और संचालन | Piyadassi
History Misc GK

भारत में पुतली कला: पटकथा, विशेषता, क्षेत्र और संचालन

विश्व स्तर पर पुतली कला में हुए आधुनिक प्रयोगों ने इसे एक पेशेवर कला के रूप में स्थापित किया है, जिसके परिणामस्वरूप कई अंतरराष्ट्रीय पुतली नाटक दल मौजूद हैं. पारंपरिक रूप से पुतलियों को उनके संचालन के आधार पर धागा पुतली, छाया पुतली, छड़ पुतली, और दस्ताना पुतली जैसी श्रेणियों में बांटा गया है. इनके

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श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास | White Revolution: Dairy Production and Rural Development in India | Piyadassi
Economics

श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास 

श्वेत क्रांति को ‘ऑपरेशन फ्लड’ के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और डेयरी उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था. यह पहल भारत को डेयरी उत्पादों की कमी वाले देश से वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाने पर

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भारत का 4 खनिज क्षेत्र, राष्ट्रीय खनिज नीति,  कानून व योजनाएं
Geography

भारत के 4 खनिज क्षेत्र, राष्ट्रीय खनिज नीति,  कानून व योजनाएं

भारत में अधिकांश खनिज क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत में पाये जाते हैं. इसलिए झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, गुजरात तथा तमिलनाडु खनिज संसाधन की दृष्टि से देश के महत्त्वपूर्ण राज्य हैं.  उत्तर भारत के विशाल जलोढ़ मैदानी भू-भाग आर्थिक दृष्टि से उपयोगी खनिज-विहीन हैं. खनिजों की उपस्थिति कुछ विशिष्ट भू-वैज्ञानिक संरचनाओं से संबद्ध होती हैं.

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भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India
Economics

भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India

भारतीय कृषि में, फसलें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं: खरीफ, रबी, और जायद. फसलें वे वनस्पतियाँ, पेड़-पौधे या पैदावार हैं जिन्हें मनुष्य या पशुओं के उपभोग के लिए बड़े पैमाने पर उगाया जाता है. फिर इन्हें काटा या तोड़ा जाता है. इन फसलों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है,

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