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राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का अर्थ, महत्व व अन्य तथ्य | Meaning, importance and other facts of the Directive Principles of State Policy by Piyadassi
Civics

राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का अर्थ, महत्व व अन्य तथ्य

भारतीय संविधान द्वारा जो मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) नागरिक को प्राप्त हुए हैं, वे बहुत कम हैं और वे पर्याप्त विस्तृत भी नहीं हैं. उनमें कुछ और अधिकार सम्मिलित किये जाने चाहिये थे. इसी अभाव की पूर्ति के लिये भारत के संविधान में राज्य की नीति-निर्देशक सिद्धान्तों का समावेश किया गया. यह भारत के संविधान […]

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मिड-डे मील योजना (पीएम पोषण योजना) का स्वरूप व उद्देश्य
Misc GK Health

मिड-डे मील योजना (पीएम पोषण योजना) का स्वरूप व उद्देश्य

आजादी के बाद भारत में शैक्षणिक पिछड़ेपन को महसूस किया गया. इसी लिए समय-समय में कई सुधार कार्यक्रम लागू किए गए. इन्हीं सुधार कार्यक्रमों में से एक मिड-डे मील योजना भी है. मिड-डे मील योजना को अब प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM POSHAN) के नाम से जाना जाता है. इसका उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त

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VVIP सुरक्षा के विभिन्न स्तर: SPG, NSG, Z+,Z, Y+, Y और X
Misc GK

VVIP सुरक्षा के विभिन्न स्तर: SPG, NSG, Z+,Z, Y+, Y और X

भारत में प्रमुख व्यक्तियों की सुरक्षा एक बहु-स्तरीय और व्यवस्थित ढाँचा है, जो आंतरिक व बाहरी सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है. VVIP सुरक्षा में विभिन्न श्रेणियां—एसपीजी, Z+, Z, Y+, Y और X—खतरे के स्तर के आकलन के आधार पर दी जाती हैं, जिसका मूल्यांकन इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर गृह

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भारत में पुतली कला: पटकथा, विशेषता, क्षेत्र और संचालन | Piyadassi
History Misc GK

भारत में पुतली कला: पटकथा, विशेषता, क्षेत्र और संचालन

विश्व स्तर पर पुतली कला में हुए आधुनिक प्रयोगों ने इसे एक पेशेवर कला के रूप में स्थापित किया है, जिसके परिणामस्वरूप कई अंतरराष्ट्रीय पुतली नाटक दल मौजूद हैं. पारंपरिक रूप से पुतलियों को उनके संचालन के आधार पर धागा पुतली, छाया पुतली, छड़ पुतली, और दस्ताना पुतली जैसी श्रेणियों में बांटा गया है. इनके

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श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास | White Revolution: Dairy Production and Rural Development in India | Piyadassi
Economics

श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास 

श्वेत क्रांति को ‘ऑपरेशन फ्लड’ के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और डेयरी उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था. यह पहल भारत को डेयरी उत्पादों की कमी वाले देश से वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाने पर

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भारत का 4 खनिज क्षेत्र, राष्ट्रीय खनिज नीति,  कानून व योजनाएं
Geography

भारत के 4 खनिज क्षेत्र, राष्ट्रीय खनिज नीति,  कानून व योजनाएं

भारत में अधिकांश खनिज क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत में पाये जाते हैं. इसलिए झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, गुजरात तथा तमिलनाडु खनिज संसाधन की दृष्टि से देश के महत्त्वपूर्ण राज्य हैं.  उत्तर भारत के विशाल जलोढ़ मैदानी भू-भाग आर्थिक दृष्टि से उपयोगी खनिज-विहीन हैं. खनिजों की उपस्थिति कुछ विशिष्ट भू-वैज्ञानिक संरचनाओं से संबद्ध होती हैं.

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भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India
Economics

भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India

भारतीय कृषि में, फसलें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं: खरीफ, रबी, और जायद. फसलें वे वनस्पतियाँ, पेड़-पौधे या पैदावार हैं जिन्हें मनुष्य या पशुओं के उपभोग के लिए बड़े पैमाने पर उगाया जाता है. फिर इन्हें काटा या तोड़ा जाता है. इन फसलों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है,

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GI टैग और 2025 तक बिहार के13 प्रमाणित उत्पाद, विशेषता और क्षेत्र
Misc GK History

GI टैग और 2025 तक बिहार के 13 प्रमाणित उत्पाद, विशेषता और क्षेत्र

“GI टैग” का मतलब भौगोलिक संकेत (Geographical Indication) टैग है. यह एक ऐसा चिह्न है जो उन उत्पादों पर इस्तेमाल किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और जिनके गुण या प्रतिष्ठा उस मूल स्थान के कारण ही होती है. GI टैग क्या है? (What is GI Tag in Hindi) GI टैग

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भारत के द्वीप समूह व द्वीप, इनके भूगोल, पारिस्थितिकी व जनजीवन
Geography

भारत के द्वीप समूह व द्वीप, इनके भूगोल, पारिस्थितिकी व जनजीवन

भारत के विशाल भौगोलिक में कई द्वीप और द्वीप समूह स्थित हैं. भारत के द्वीप समूह (Islands of India in Hindi) को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जा सकता है- पहला बंगाल की खाड़ी में स्थित ‘अंडमान और निकोबार द्वीप समूह’ तथा अरब सागर में स्थित ‘लक्षद्वीप समूह’ तथा दूसरे अन्य द्वीप व द्वीप समूह.

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भारत का प्रायद्वीपीय पठार: पठार, पर्वत श्रृंखलाएँ और महत्व
Geography

भारत का प्रायद्वीपीय पठार: पठार, पर्वत श्रृंखलाएँ और महत्व

भारत का प्रायद्वीपीय पठार एक अनियमित त्रिभुजाकार आकृति वाला भूखंड है, जिसका विस्तार उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वतमाला व दिल्ली, पूर्व में राजमहल की पहाड़ियों, पश्चिम में गिर पहाड़ियों, दक्षिण में इलायची (कार्डमम) पहाड़ियों तथा उत्तर-पूर्व में शिलॉंग एवं कार्बी-एंगलोंग पठार तक है. इसकी औसत ऊँचाई 600-900 मीटर है. यह गोंडवानालैंड के टूटने एवं उसके उत्तर

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