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होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता | Home Rule League Movement and Lucknow Pact (1916)
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होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता (1916)

होमरूल आंदोलन को होमरूल लीग आंदोलन भी कहा जाता है. यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक अहम् उत्थान है. इसलिए प्रतियोगी परीक्षार्थियों समेत अन्य शिक्षार्थियों व जनसामान्य को इसका जानकारी होना ऐतिहासिक पहलुओं के समझ के लिए आवश्यक है. तो आइए हम इस आंदोलन के पृष्ठभूमि, अवधारणाएं विकास, प्रभाव और परिणामों का विस्तृत […]

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ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र
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ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र

प्राचीन भारत के इतिहास में कामरूप राज्य (State of Kamrup) का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। उत्तर-पूर्व भारत के इतिहास, संस्कृति, धर्म, राजनीति तथा सभ्यता के विकास में इस राज्य की केंद्रीय भूमिका रही है। कामरूप केवल एक सीमांत राज्य नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और उत्तर-पूर्व की जनजातीय परम्पराओं के समन्वय का महान केन्द्र

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कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक मोड़
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कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रारम्भिक चरण में, जब राष्ट्रवादी चेतना तेज़ी से विकसित हो रही थी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं, दिसंबर 1907 में कांग्रेस का सूरत विभाजन हुआ। यह घटना केवल संगठनात्मक टूट नहीं थी, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उदारवादी (नरमपंथी) और उग्रवादी (अतिवादी) विचारधाराओं के गहरे वैचारिक संघर्ष का परिणाम

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बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति
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बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति

बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के समय की एक बड़ी परिघटना है. लार्ड कर्जन का कार्यकाल भारत मे प्रतिक्रियावादी साम्राज्यवादी चालों के लिए जाना जाता है. कर्जन का दिमाग हर उस मुद्दे की ओर आकर्षित होता था जिससे भारतीय राष्ट्रीयता तथा भारत की अखंडता पर आघात किया जा सके. लार्ड कर्जन ने बंगाल की अखंडता पर

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प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व | Battle of Plassey Reasons Incidents and Aftermath in HIndi
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प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व

प्लासी युद्ध के शुरुआत के कई छिपे रहस्य थे. रॉबर्ट क्लाइव, सिराजुद्दौला को बंगाल की गद्दी से उतारने की अपनी योजना को अंतिम रूप देने में लगा हुआ था. उसने नवाब सिराजुद्दौला को एक पत्र लिखा, जिसमें उस पर अलीनगर की संधि (फरवरी 1757) को तोड़ने और फ्रांसीसियों के साथ साठगांठ करने जैसे विभिन्न आरोप

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भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़

1942 का भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement – QIM in Hindi) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में कॉंग्रेस द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध छेड़ा गया तीसरा और सबसे निर्णायक जन-आंदोलन था. इस व्यापक संघर्ष ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक अपरिहार्य मोड़ पर ला दिया.

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मुगल साम्राज्य (Mughal Empire): स्थापना, मुख्य शासक, प्रशासन, कला, अर्थव्यवस्था व पतन
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मुगल साम्राज्य: स्थापना, मुख्य शासक, प्रशासन, कला, अर्थव्यवस्था व पतन

भारतीय इतिहास में मुगल साम्राज्य (Mughal Empire in Hindi) एक युग के समान है. सल्तनतकाल की समाप्ति के साथ भारतीय इतिहास में इस नए युग का प्रारम्भ होता है. भारतीय इतिहास का यह नव युग मुगलकाल के नाम से प्रसिद्ध है. इस राजवंश का संस्थापक बाबर था जो चगताई तुर्क था. बाबर अपने पिता की

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भारत में यूरोपियों का आगमन | The Arrival of Europeans in India
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भारत में यूरोपीय व इनके कंपनियों का आगमन | The Arrival of Europeans in India

भारत में यूरोपीय लोगों का आगमन कोई आकस्मिक घटना नहीं हैं. प्राचीन काल से ही भारत सोने की चिड़िया कहलाता था. इस कारण विदेशी हमेशा इस देश के प्रति आकृष्ट होते रहे थे. वे व्यापारी, आक्रमणकारी, छात्र या फिर जिज्ञासु पर्यटक के रूप में भारत आते रहे. अति प्राचीन काल से ही भारत और यूरोप

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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), दांडी मार्च व प्रथम 2 गोलमेज सम्मेलन | Civil Disobedience Movement, Dandi March and the first two Round Table Conferences
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), दांडी मार्च व प्रथम 2 गोलमेज सम्मेलन | Civil Disobedience Movement, Dandi March and the first two Round Table Conferences

भारतीय स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आंदोलन में सविनय अवज्ञा आंदोलन स्वरणक्षरों में अंकित हैं. इसकी शुरुआत दांडी मार्च से हुई, जिसे नमक सत्याग्रह भी कहा जाता है. यह आंदोलन मोहनदास करमचंद गांधी के नेतृत्व में अहिंसक प्रतिरोध के रूप में प्रारंभ हुआ था. इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर लगाए गए एकाधिकार का विरोध करना

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साम्प्रदायिक निर्णय, पूना समझौता और गांधी का हरिजन आंदोलन | Communal Award and Poona Pact, 1932 and Harijan Movement of Gandhi
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साम्प्रदायिक निर्णय, पूना समझौता और गांधी का हरिजन आंदोलन | Communal Award and Poona Pact, 1932 and Harijan Movement of Gandhi

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रेम्जे मेकडोनाल्ड ने 16 अगस्त 1932 को ‘साम्प्रदायिक निर्णय’ की घोषणा की. यह विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधित्व के विषय पर जारी किया गया था. इसे ही कम्यूनल पंचाट भी कहा जाता हैं. इसके तहत प्रत्येक अल्पसंख्यक समुदाय के लिये विधानमंडलों में कुछ सीटें सुरक्षित रखी गई, जिनके सदस्यों का चुनाव पृथक् निर्वाचक

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