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भारत का माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र: उद्भव, आकार, नियामकीय ढांचा व अन्य तथ्य | India's Microfinance Sector: Evolution, Size, Regulatory Framework, and Other Facts
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भारत का माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र: उद्भव, आकार, नियामकीय ढांचा व अन्य तथ्य

भारत में बड़ी आबादी लंबे समय तक औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से वंचित रही. निम्न आय वर्ग, छोटे किसान, कुटीर उद्यमी तथा स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए संस्थागत ऋण प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था. इस अंतर को कम करने में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र (सूक्ष्मवित्त क्षेत्र) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसने बिना संपार्श्विक छोटे ऋण उपलब्ध कराकर […]

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भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंकिंग का स्वरुप | The Nature of the Reserve Bank of India and Indian Banking
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भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंकिंग का स्वरुप

भारत की बैंकिंग व्यवस्था मुख्यतः द्वि-स्तरीय (Two-tier) है. इसके शीर्ष पर भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है. RBI मौद्रिक नीति बनाता है, मुद्रा जारी करता है तथा सभी बैंकों का नियमन और पर्यवेक्षण करता है. इसके अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी

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भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, कारण और कानूनी निहितार्थ
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भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, कारण और कानूनी निहितार्थ

समानांतर अर्थव्यवस्था को काली या छाया अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है. यह देश की आधिकारिक अर्थव्यवस्था के समानांतर चलने वाली आर्थिक व्यवस्था है. इसका आधार काला धन होता है. यानी ऐसी आय या संपत्ति, जिसे सरकार और कर विभाग से छिपाया जाता है और जिस पर नियमानुसार कर नहीं चुकाया जाता. ऐसी गतिविधियां सरकार की

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भारत में ग्रामीण ऋण: संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था और समावेशी विकास
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भारत में ग्रामीण ऋण: संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था और समावेशी विकास

भारत की अर्थव्यवस्था में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए ग्रामीण ऋण व्यवस्था (Rural Credit System) देश के विकास का एक प्रमुख आधार मानी जाती है. किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए समय पर सस्ता ऋण अत्यंत आवश्यक है. इससे कृषि उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के अवसर बनते हैं

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भारत में सहकारी बैंकिंग प्रणाली का सांकेतिक चित्र, जिसमें सहकारी बैंक, सदस्य-आधारित बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और सहयोग के सिद्धांत को दर्शाया गया है.
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भारत में सहकारी बैंकिंग प्रणाली (Cooperative Banking in India)

सहकारी बैंकिंग प्रणाली भारत की ऐसी बैंकिंग व्यवस्था है, जो सहकारिता (Cooperation), पारस्परिक सहायता और लोकतांत्रिक प्रबंधन के सिद्धांत पर आधारित है. इसमें बैंक का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या निजी कंपनी के पास नहीं होता, बल्कि इसके सदस्यों के पास होता है. प्रत्येक सदस्य बैंक का ग्राहक भी होता है और उसका सह-स्वामी भी.

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विश्व के 25 प्रसिद्ध अर्थशास्त्री – एडम स्मिथ, कार्ल मार्क्स, जॉन मेनार्ड कीन्स, अमर्त्य सेन सहित प्रमुख अर्थशास्त्रियों के जीवन, सिद्धांत और आर्थिक योगदान पर आधारित चित्र.
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विश्व के 25 प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, जीवन परिचय और योगदान

अर्थशास्त्र मानव की आवश्यकताओं, सीमित संसाधनों और उनके सर्वोत्तम उपयोग का विज्ञान है. समय-समय पर अनेक महान अर्थशास्त्रियों ने अपने सिद्धांतों और विचारों से इस विषय को नई दिशा दी. उनके कार्यों ने आर्थिक नीतियों, व्यापार, वित्त, विकास, रोजगार, गरीबी उन्मूलन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया. एडम स्मिथ से लेकर डैनी रोड्रिक

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भारत में म्यूचुअल फंड, आकार, प्रकार, विनियमन व अन्य तथ्य
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भारत में म्यूचुअल फंड, आकार, प्रकार, विनियमन व अन्य तथ्य

पिछले कुछ वर्षों में भारत में निवेश की संस्कृति में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है. पहले जहाँ अधिकांश लोग बैंक जमा, डाकघर बचत योजनाओं या पारंपरिक निवेश विकल्पों पर निर्भर रहते थे, वहीं आज करोड़ों निवेशक म्यूचुअल फंडों के माध्यम से पूंजी बाजार से जुड़ रहे हैं. विशेष रूप से सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic

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भारत के 12 पंचवर्षीय योजनाएं (Five Year Plans), अवधारणा, उपलब्धियाँ व सीमाएँ
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भारत के 12 पंचवर्षीय योजनाएं, अवधारणा, उपलब्धियाँ व सीमाएँ

पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) भारत सरकार द्वारा निर्धारित पाँच वर्षों की अवधि के लिए तैयार की जाने वाली समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजनाएँ थीं. इनका उद्देश्य देश के उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक एवं नियोजित उपयोग कर कृषि, उद्योग, अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गरीबी उन्मूलन तथा सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में संतुलित एवं समावेशी

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मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) का चित्र जिसमें बैंक, मुद्रा, रुपये का प्रतीक और आर्थिक वृद्धि को दर्शाया गया है।
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मुद्रा आपूर्ति (Money Supply): प्रकार, घटक, महत्व, अवधारणाएँ, निर्धारक व अन्य पहलू

इस लेख में मुद्रा आपूर्ति के महत्व, अवधारणा, मापन, विभिन्न मापों, निर्धारकों, बजट घाटे से संबंध तथा खुली अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया गया है. मुद्रा आपूर्ति क्या है (What is Money Supply)? मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) से आशय किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय पर जनता के पास

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आईपीओ क्या हैं? इसकी प्रक्रिया, प्रकार, कानून और भारतीय बाज़ार
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आईपीओ: इसकी प्रक्रिया, कानून, प्रकार और भारतीय बाज़ार

आईपीओ यानि इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक निजी कंपनी के लिए सार्वजनिक बाज़ार में प्रवेश करने का पहला कदम है. इसे प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के नाम से भी जाना जाता है. यह प्रक्रिया कंपनी को आम जनता से पूंजी जुटाने, ब्रांड की दृश्यता और विश्वसनीयता बढ़ाने तथा शुरुआती निवेशकों को निकास का अवसर प्रदान करती

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