Economics

भारत में म्यूचुअल फंड, आकार, प्रकार, विनियमन व अन्य तथ्य
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भारत में म्यूचुअल फंड, आकार, प्रकार, विनियमन व अन्य तथ्य

पिछले कुछ वर्षों में भारत में निवेश की संस्कृति में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है. पहले जहाँ अधिकांश लोग बैंक जमा, डाकघर बचत योजनाओं या पारंपरिक निवेश विकल्पों पर निर्भर रहते थे, वहीं आज करोड़ों निवेशक म्यूचुअल फंडों के माध्यम से पूंजी बाजार से जुड़ रहे हैं. विशेष रूप से सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic […]

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भारत के 12 पंचवर्षीय योजनाएं (Five Year Plans), अवधारणा, उपलब्धियाँ व सीमाएँ
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भारत के 12 पंचवर्षीय योजनाएं, अवधारणा, उपलब्धियाँ व सीमाएँ

पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) भारत सरकार द्वारा निर्धारित पाँच वर्षों की अवधि के लिए तैयार की जाने वाली समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजनाएँ थीं. इनका उद्देश्य देश के उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक एवं नियोजित उपयोग कर कृषि, उद्योग, अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गरीबी उन्मूलन तथा सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में संतुलित एवं समावेशी

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मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) का चित्र जिसमें बैंक, मुद्रा, रुपये का प्रतीक और आर्थिक वृद्धि को दर्शाया गया है।
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मुद्रा आपूर्ति (Money Supply): प्रकार, घटक, महत्व, अवधारणाएँ, निर्धारक व अन्य पहलू

इस लेख में मुद्रा आपूर्ति के महत्व, अवधारणा, मापन, विभिन्न मापों, निर्धारकों, बजट घाटे से संबंध तथा खुली अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया गया है. मुद्रा आपूर्ति क्या है (What is Money Supply)? मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) से आशय किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय पर जनता के पास

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आईपीओ क्या हैं? इसकी प्रक्रिया, प्रकार, कानून और भारतीय बाज़ार
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आईपीओ: इसकी प्रक्रिया, कानून, प्रकार और भारतीय बाज़ार

आईपीओ यानि इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक निजी कंपनी के लिए सार्वजनिक बाज़ार में प्रवेश करने का पहला कदम है. इसे प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के नाम से भी जाना जाता है. यह प्रक्रिया कंपनी को आम जनता से पूंजी जुटाने, ब्रांड की दृश्यता और विश्वसनीयता बढ़ाने तथा शुरुआती निवेशकों को निकास का अवसर प्रदान करती

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भारत में सीमा शुल्क और टैरिफ, इतिहास, कानूनी व संवैधानिक प्रावधान, प्रकार व अन्य तथ्य
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भारत में सीमा शुल्क और टैरिफ, इतिहास, कानूनी प्रावधान, प्रकार व अन्य तथ्य

इस लेख में भारत में सीमा शुल्क और टैरिफ से संबंधित तथ्य प्रस्तुत किया गया है. इसमें, सीमा शुल्क के ऐतिहासिक विकास, इसके पीछे के कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों, विभिन्न प्रकार के टैरिफ जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को संग्रहीत किया गया है. इसके अलावा आधुनिक वैश्विक व्यापार तंत्र में इसके प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक पहलुओं को भी

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राष्ट्रीय आय (National Income) का अवधारणा, मापन व घटक
Economics

राष्ट्रीय आय (National Income) का अवधारणा, मापन व घटक

राष्ट्रीय आय की अवधारणा आधुनिक वैश्विक अर्थतन्त्र में सबसे अधिक चर्चित विषयों में से एक है. इसके कई वजहें हैं. किसी भी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन एवं वितरण करना होता है. यह कार्य उत्पादन प्रणाली के माध्यम से संपन्न होता है, क्योंकि

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विश्व व्यापार संगठन (WTO): स्थापना, महत्व, सम्मेलन, उपलब्धि और चुनौतियाँ | Article on World Trade Organisation for Economics Student in Hindi also for UPSC, SSC, State SSC & PCS Government Exams by Piyadassi.
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विश्व व्यापार संगठन (WTO): स्थापना, महत्व, सम्मेलन, उपलब्धि और चुनौतियाँ

विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization- WTO) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. इसकी स्थापना 1 जनवरी, 1995 को टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते (General Agreement on Tariffs and Trade- GATT) के स्थान पर हुई थी. यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों को संचालित करने वाला एकमात्र वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है. WTO का निर्माण मोरक्को के माराकेश

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श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास | White Revolution: Dairy Production and Rural Development in India | Piyadassi
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श्वेत क्रांति: भारत में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास 

श्वेत क्रांति को ‘ऑपरेशन फ्लड’ के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और डेयरी उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था. यह पहल भारत को डेयरी उत्पादों की कमी वाले देश से वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाने पर

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भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India
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भारत के मुख्य फसलें, वर्गीकरण, क्षेत्र व अन्य तथ्य | Major Crops of India

भारतीय कृषि में, फसलें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं: खरीफ, रबी, और जायद. फसलें वे वनस्पतियाँ, पेड़-पौधे या पैदावार हैं जिन्हें मनुष्य या पशुओं के उपभोग के लिए बड़े पैमाने पर उगाया जाता है. फिर इन्हें काटा या तोड़ा जाता है. इन फसलों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है,

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करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव | Effects of Taxation on Economy
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करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस लेख में करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभावों का संक्षिप्त विश्लेषण किया गया है. इस नोट में कराधान का उत्पादन, विकास, वितरण, और संसाधन आवंटन पर प्रभाव का वर्णन है. साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के विशिष्ट संदर्भ को भी शामिल किया गया है.  करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव करारोपण, अर्थात् taxation, सरकार के लिए राजस्व

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