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भारत का महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) | Attorney General of India
Civics

भारत का महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल, अनु० 76 )

भारत का महान्यायवादी संघ की कार्यपालिका का एक अंग है. महान्यायवादी (AG) देश कासर्वोच्च विधि अधिकारी होता है. संविधान के अनुच्छेद 76 में महान्यायवादी के पद से संबंधित प्रावधान किए गए है. कानूनी मामलों में केंद्र सरकार को सलाह एवं परामर्श देना इनका मुख्य काम है. औपनिवेशिक काल में भारत का महान्यायवादी भारत का महान्यायवादी […]

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करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव | Effects of Taxation on Economy
Economics

करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस लेख में करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभावों का संक्षिप्त विश्लेषण किया गया है. इस नोट में कराधान का उत्पादन, विकास, वितरण, और संसाधन आवंटन पर प्रभाव का वर्णन है. साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के विशिष्ट संदर्भ को भी शामिल किया गया है.  करारोपण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव करारोपण, अर्थात् taxation, सरकार के लिए राजस्व

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दिल्ली सल्तनत के पतन के कारण
History

दिल्ली सल्तनत के पतन के कारण और अंत

इतिहास में कई राजवंशों और साम्राज्य के उत्थान और पतन का दास्तां दर्ज़ है. दिल्ली सल्तनत का पतन भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है. तुर्क आक्रमणकारी  मुहम्मद गोरी ने प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली में अपना राज्य स्थापित किया था. मध्यकालीन इतिहास में इसे ही दिल्ली सल्तनत कहा गया है. इनका शासन

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करारोपण का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत एवं वर्गीकरण
Economics

करारोपण का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत एवं वर्गीकरण

इस लेख में करारोपण की परिभाषा, सिद्धांत, वर्गीकरण, और आवश्यकता को सरल और व्यवस्थित भाषा में सभी तथ्यों को शामिल करते हुए समझाया गया है. इसके माध्यम से आप करारोपण के विभिन्न दरों के कारण, कुछ लोगों को कर से छूट और कर सब्सिडी के पीछे के कारणों व सरकार की मंशा को समझ पाएंगे?

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इब्राहिम लोदी (1517-1526) का शासन, राजत्व सिद्धांत और मृत्यु
History

इब्राहिम लोदी (1517-1526) का शासन, राजत्व सिद्धांत और मृत्यु

इब्राहिम लोदी (1480 – 21 अप्रैल 1526) दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान थे. वह अपने पिता सिकंदर खान लोदी की मृत्यु के बाद 1517 में सुल्तान बने. उन्होंने 1526 तक नौ वर्षों तक शासन किया. 1526 में बाबर की हमलावर सेना द्वारा पानीपत की लड़ाई में पराजित हुए और मारे गए, जिससे भारत में मुगल

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ऑक्सीजन चक्र: प्रक्रिया, स्थान, सजीवों की भूमिका और मानवीय प्रभाव
Geography Ecology

ऑक्सीजन चक्र: प्रक्रिया, स्थान, सजीवों की भूमिका और मानवीय प्रभाव

इस लेख में ऑक्सीजन चक्र की समग्र प्रक्रिया, इसके प्रमुख जलाशयों, सजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका और मानवीय गतिविधियों के बढ़ते प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण है. यह वैज्ञानिक तथ्यों और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय प्रक्रिया की जटिलताओं वर्णित करता हैं. ऑक्सीजन चक्र क्या है? (What is Oxygen Cycle in Hindi) ऑक्सीजन चक्र एक जटिल जैव-रासायनिक चक्र है. यह 

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सल्फर चक्र: परिभाषा, चरण, भंडार, महत्व और अम्ल वर्षा
Ecology Geography

सल्फर चक्र: परिभाषा, चरण, भंडार और महत्व

सल्फर चक्र पृथ्वी पर एक मौलिक जैव-भू-रासायनिक प्रक्रिया है. यह सल्फर के विभिन्न भंडारों और रासायनिक रूपों के बीच निरंतर संचलन का वर्णन करती है. यह चक्र पृथ्वी की जैविक, भूवैज्ञानिक और रासायनिक प्रणालियों को एकीकृत करता है. इस कारण यह वैश्विक मौलिक चक्रण का एक महत्वपूर्ण घटक बन जाता है. सल्फर चक्र से सुनिश्चित

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फॉस्फोरस चक्र के 5 चरण, महत्व और प्रभाव
Geography Ecology

फॉस्फोरस चक्र के 5 चरण, महत्व और प्रभाव

फॉस्फोरस चक्र एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया हैं. यह पृथ्वी पर सभी जीवन रूपों के लिए महत्वपूर्ण हैं. इस चक्र की खासियत इसे अन्य प्रमुख पोषक तत्व के चक्रों से अलग करती हैं. इस लेख में हम इसके विभिन्न प्रक्रिया व प्रकृति से इसके अभिक्रिया को समझेंगे. फॉस्फोरस चक्र क्या हैं? (What is Phosphorus Cycle in Hindi)

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बिहार में चाय की खेती: वर्तमान स्थिति, संभावनाएं, चुनौतियाँ और क्षेत्र
Misc GK Others

बिहार में चाय की खेती: वर्तमान स्थिति, संभावनाएं, चुनौतियाँ और क्षेत्र

बिहार में चाय की खेती तेजी से बढ़ रहा है. यह मुख्य रूप से किशनगंज जिले में केंद्रित है. इसके अलावा पूर्णिया, कटिहार और अररिया में भी इसे बढ़ावा दिया जा रहा हैं. हिमालय के तलहटी में बसे इन इलाकों का भूगोल और मौसम इसके विकास का मुख्य कारण हैं. बिहार चाय उत्पादन के मामले

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नाइट्रोजन चक्र: चरण, घटक, महत्व और सूक्ष्मजीवों की भूमिका | Nitrogen cycle: phases, components, importance and role of microorganisms in Hindi
Ecology Geography

नाइट्रोजन चक्र: चरण, घटक, महत्व और सूक्ष्मजीवों की भूमिका

नाइट्रोजन चक्र पृथ्वी पर नाइट्रोजन का एक अनिवार्य जैव-भूरासायनिक चक्र है. इस प्रक्रिया में वायुमंडल की स्वतंत्र नाइट्रोजन को विभिन्न जैविक और अजैविक विधियों द्वारा नाइट्रोजनीय यौगिकों में स्थिर किया जाता है. फिर इन यौगिकों को पुनः स्वतंत्र नाइट्रोजन में परिवर्तित करके वायुमंडल में वापस लौटाया जाता है. यह एक जटिल चक्र है.  वायुमंडल में

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