भारत का माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र: उद्भव, आकार, नियामकीय ढांचा व अन्य तथ्य
भारत में बड़ी आबादी लंबे समय तक औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से वंचित रही. निम्न आय वर्ग, छोटे किसान, कुटीर उद्यमी तथा स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए संस्थागत ऋण प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था. इस अंतर को कम करने में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र (सूक्ष्मवित्त क्षेत्र) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसने बिना संपार्श्विक छोटे ऋण उपलब्ध कराकर […]
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