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आचार्य विनोबा भावे : जीवन और योगदान
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आचार्य विनोबा भावे और भूदान आंदोलन

विनोबा भावे का पूरा नाम विनायक नरहरि भावे था. उन्हें आचार्य विनोबा भावे के नाम से भी जाना जाता है. वे महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मण परिवार से संबंध रखते थे. बचपन से ही वे गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अत्यंत प्रतिभाशाली थे. उन्हें कई भाषाओं का अच्छा ज्ञान था. 20 वर्ष की आयु में […]

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होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता | Home Rule League Movement and Lucknow Pact (1916)
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होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता (1916)

होमरूल आंदोलन को होमरूल लीग आंदोलन भी कहा जाता है. यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक अहम् उत्थान है. इसलिए प्रतियोगी परीक्षार्थियों समेत अन्य शिक्षार्थियों व जनसामान्य को इसका जानकारी होना ऐतिहासिक पहलुओं के समझ के लिए आवश्यक है. तो आइए हम इस आंदोलन के पृष्ठभूमि, अवधारणाएं विकास, प्रभाव और परिणामों का विस्तृत

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ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र
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ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र

प्राचीन भारत के इतिहास में कामरूप राज्य (State of Kamrup) का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। उत्तर-पूर्व भारत के इतिहास, संस्कृति, धर्म, राजनीति तथा सभ्यता के विकास में इस राज्य की केंद्रीय भूमिका रही है। कामरूप केवल एक सीमांत राज्य नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और उत्तर-पूर्व की जनजातीय परम्पराओं के समन्वय का महान केन्द्र

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कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक मोड़
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कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रारम्भिक चरण में, जब राष्ट्रवादी चेतना तेज़ी से विकसित हो रही थी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं, दिसंबर 1907 में कांग्रेस का सूरत विभाजन हुआ। यह घटना केवल संगठनात्मक टूट नहीं थी, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उदारवादी (नरमपंथी) और उग्रवादी (अतिवादी) विचारधाराओं के गहरे वैचारिक संघर्ष का परिणाम

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बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति
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बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति

बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के समय की एक बड़ी परिघटना है. लार्ड कर्जन का कार्यकाल भारत मे प्रतिक्रियावादी साम्राज्यवादी चालों के लिए जाना जाता है. कर्जन का दिमाग हर उस मुद्दे की ओर आकर्षित होता था जिससे भारतीय राष्ट्रीयता तथा भारत की अखंडता पर आघात किया जा सके. लार्ड कर्जन ने बंगाल की अखंडता पर

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प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व | Battle of Plassey Reasons Incidents and Aftermath in HIndi
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प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व

प्लासी युद्ध के शुरुआत के कई छिपे रहस्य थे. रॉबर्ट क्लाइव, सिराजुद्दौला को बंगाल की गद्दी से उतारने की अपनी योजना को अंतिम रूप देने में लगा हुआ था. उसने नवाब सिराजुद्दौला को एक पत्र लिखा, जिसमें उस पर अलीनगर की संधि (फरवरी 1757) को तोड़ने और फ्रांसीसियों के साथ साठगांठ करने जैसे विभिन्न आरोप

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भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़

1942 का भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement – QIM in Hindi) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में कॉंग्रेस द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध छेड़ा गया तीसरा और सबसे निर्णायक जन-आंदोलन था. इस व्यापक संघर्ष ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक अपरिहार्य मोड़ पर ला दिया.

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मुगल साम्राज्य (Mughal Empire): स्थापना, मुख्य शासक, प्रशासन, कला, अर्थव्यवस्था व पतन
History

मुगल साम्राज्य: स्थापना, मुख्य शासक, प्रशासन, कला, अर्थव्यवस्था व पतन

भारतीय इतिहास में मुगल साम्राज्य (Mughal Empire in Hindi) एक युग के समान है. सल्तनतकाल की समाप्ति के साथ भारतीय इतिहास में इस नए युग का प्रारम्भ होता है. भारतीय इतिहास का यह नव युग मुगलकाल के नाम से प्रसिद्ध है. इस राजवंश का संस्थापक बाबर था जो चगताई तुर्क था. बाबर अपने पिता की

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जातिवाद (Casteism): उत्पत्ति, कारण, दुष्प्रभाव व रोकने के उपाय
Polity

जातिवाद (Casteism): उत्पत्ति, कारण, दुष्प्रभाव व रोकने के उपाय

सामान्य अर्थ मे अपनी जाति के प्रति निष्ठा का भाव ही जातिवाद (Casteism) है. जातिवाद जाति के सदस्यों की वह संकुचित भावना है, जो राष्ट्र तथा समाज के सामान्य हितों की अवहेलना करते हुए अपनी जाति के सदस्यों के हितों को बढ़ावा देती है तथा उन्हे आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती है. दुनिया मे

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राजनीतिक दल (Political Party) की विशेषताएं, उत्पत्ति, कार्य, भूमिका, महत्व और भारत
Polity

राजनीतिक दल की विशेषताएं, उत्पत्ति, कार्य, भूमिका, महत्व और भारत

प्रजातंत्र मे राजनीतिक दलों का होना बहुत आवश्यक और अनिवार्य हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि राजनीतिक दल का अर्थ क्या हैं. आमतौर से एक ही राजनीतिक विचारधारा के समर्थन मिलकर राजसत्ता पाने के उद्देश्य से जो संगठन बनाते हैं, उसे राजनीतिक दल कहा जाता हैं. राजनीतिक दल जनमत के निर्माण और अभिव्यक्ति का

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