Economics

निर्धनता (Poverty) को दर्शाता व्यक्ति, खाली कटोरा और आर्थिक अभाव का प्रतीकात्मक चित्र
Economics

निर्धनता (गरीबी): अर्थ, प्रकार, कारण, प्रभाव एवं निवारण

निर्धनता केवल कम आय या खाली जेब का नाम नहीं है. यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं, क्षमताओं और सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी संसाधनों से वंचित रह जाता है. भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा—इनमें से किसी एक की कमी भी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. भारत […]

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भारतीय विकास बैंक और भारत में विकास वित्तीय संस्थाओं का चित्रण
Economics

भारतीय विकास बैंक: प्रमुख Development Banks, कार्य एवं तथ्य

विकासशील अर्थव्यवस्था में उद्योग, अवसंरचना, कृषि और छोटे उद्यमों के लिए दीर्घकालीन पूंजी आवश्यक होती है. सामान्य बैंकिंग व्यवस्था इन सभी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती. इसी कारण विकास बैंकों और विकास वित्तीय संस्थाओं का विकास हुआ. स्वतंत्रता के बाद भारत में औद्योगीकरण, कृषि, रोजगार और अवसंरचना के लिए विशेषीकृत वित्तीय संस्थाएँ बनाई गईं.

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राजकोषीय नीति Fiscal Policy के प्रमुख साधन कर, सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक ऋण और आर्थिक विकास का चित्रण
Economics

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy): अर्थ, उद्देश्य, उपकरण, प्रकार और भारत में महत्व

राजकोषीय नीति किसी देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देने का सरकार के पास एक प्रमुख साधन है. इसके माध्यम से सरकार करों, सार्वजनिक व्यय, ऋण और निवेश जैसे उपायों का इस्तेमाल करके आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है. इसका उद्देश्य केवल सरकारी आय और खर्च का प्रबंधन करना नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार, सामाजिक न्याय

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अर्थशास्त्र और अर्थव्यवस्था का परिचय - कृषि, उद्योग, सेवाएँ, ज्ञान और आर्थिक गतिविधियाँ
Economics

अर्थशास्त्र का परिचय (Introduction to Economics)

हम रोज आर्थिक निर्णय लेते हैं. क्या खरीदना है, कितना खर्च करना है, कहाँ बचत करनी है और किस काम पर समय लगाना है. परिवार से लेकर सरकार और पूरी दुनिया तक, संसाधनों के उपयोग से जुड़े ऐसे निर्णय लगातार लिए जाते हैं. इन्हीं निर्णयों और उनके परिणामों को समझने का व्यवस्थित अध्ययन अर्थशास्त्र (Economics)

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भारत का माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र: उद्भव, आकार, नियामकीय ढांचा व अन्य तथ्य | India's Microfinance Sector: Evolution, Size, Regulatory Framework, and Other Facts
Economics

भारत का माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र: उद्भव, आकार, नियामकीय ढांचा व अन्य तथ्य

भारत में बड़ी आबादी लंबे समय तक औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से वंचित रही. निम्न आय वर्ग, छोटे किसान, कुटीर उद्यमी तथा स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए संस्थागत ऋण प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था. इस अंतर को कम करने में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र (सूक्ष्मवित्त क्षेत्र) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसने बिना संपार्श्विक छोटे ऋण उपलब्ध कराकर

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भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंकिंग का स्वरुप | The Nature of the Reserve Bank of India and Indian Banking
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भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंकिंग का स्वरुप

भारत की बैंकिंग व्यवस्था मुख्यतः द्वि-स्तरीय (Two-tier) है. इसके शीर्ष पर भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है. RBI मौद्रिक नीति बनाता है, मुद्रा जारी करता है तथा सभी बैंकों का नियमन और पर्यवेक्षण करता है. इसके अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी

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भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, कारण और कानूनी निहितार्थ
Economics

भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, कारण और कानूनी निहितार्थ

समानांतर अर्थव्यवस्था को काली या छाया अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है. यह देश की आधिकारिक अर्थव्यवस्था के समानांतर चलने वाली आर्थिक व्यवस्था है. इसका आधार काला धन होता है. यानी ऐसी आय या संपत्ति, जिसे सरकार और कर विभाग से छिपाया जाता है और जिस पर नियमानुसार कर नहीं चुकाया जाता. ऐसी गतिविधियां सरकार की

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भारत में ग्रामीण ऋण: संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था और समावेशी विकास
Economics

भारत में ग्रामीण ऋण: संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था और समावेशी विकास

भारत की अर्थव्यवस्था में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए ग्रामीण ऋण व्यवस्था (Rural Credit System) देश के विकास का एक प्रमुख आधार मानी जाती है. किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए समय पर सस्ता ऋण अत्यंत आवश्यक है. इससे कृषि उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के अवसर बनते हैं

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भारत में सहकारी बैंकिंग प्रणाली का सांकेतिक चित्र, जिसमें सहकारी बैंक, सदस्य-आधारित बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और सहयोग के सिद्धांत को दर्शाया गया है.
Economics

भारत में सहकारी बैंकिंग प्रणाली (Cooperative Banking in India)

सहकारी बैंकिंग प्रणाली भारत की ऐसी बैंकिंग व्यवस्था है, जो सहकारिता (Cooperation), पारस्परिक सहायता और लोकतांत्रिक प्रबंधन के सिद्धांत पर आधारित है. इसमें बैंक का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या निजी कंपनी के पास नहीं होता, बल्कि इसके सदस्यों के पास होता है. प्रत्येक सदस्य बैंक का ग्राहक भी होता है और उसका सह-स्वामी भी.

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विश्व के 25 प्रसिद्ध अर्थशास्त्री – एडम स्मिथ, कार्ल मार्क्स, जॉन मेनार्ड कीन्स, अमर्त्य सेन सहित प्रमुख अर्थशास्त्रियों के जीवन, सिद्धांत और आर्थिक योगदान पर आधारित चित्र.
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विश्व के 25 प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, जीवन परिचय और योगदान

अर्थशास्त्र मानव की आवश्यकताओं, सीमित संसाधनों और उनके सर्वोत्तम उपयोग का विज्ञान है. समय-समय पर अनेक महान अर्थशास्त्रियों ने अपने सिद्धांतों और विचारों से इस विषय को नई दिशा दी. उनके कार्यों ने आर्थिक नीतियों, व्यापार, वित्त, विकास, रोजगार, गरीबी उन्मूलन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया. एडम स्मिथ से लेकर डैनी रोड्रिक

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