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जलालुद्दीन खिलजी (1290-1296) का शासन और खिलजी राजवंश
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जलालुद्दीन खिलजी (1290-1296) का शासन और खिलजी वंश

भारत में खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी था. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने अपना जीवन एक सैनिक के रूप में आरम्भ किया था. वह अपनी योग्यता के बल पर तरक्की करता हुआ वह क्रमशः सेनानायक एवं सुबेदार बन गया. कैकुबाद के समय से उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ने लगा. वह इस काल में आरिजे ममालिक बनाया […]

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ममलूक/ गुलाम वंश के 5 अलोकप्रिय शासक
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गुलाम वंश के 5 अलोकप्रिय शासक

शहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी के निधन के पश्चात उसके द्वारा विजित भारतीय क्षेत्र पर उसके गुलाम एवं प्रतिनिधि कुतुबुद्दीन ऐबक का अधिकार हो गया. गुलाम वंश के पहले शासक कुतुबुद्दीन ने भारत में प्रथम संप्रभुता सम्पन्न मुस्लिम राजवंश की स्थापना की दिल्ली इस राज्य की राजधानी थी. अतः इसे दिल्ली सल्तनत कहा गया. चूंकि ऐबक, मुहम्मद

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गयासुद्दीन बलबन (1266-1287) का शासन और उपलब्धियां | Reign and achievements of Ghiyasuddin Balban (1266-1287)
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गयासुद्दीन बलबन (1266-1287) का शासन और उपलब्धियां

दिल्ली के प्रारम्भिक सुलतानों में गयासुद्दीन बलबन सबसे महान और योग्य शासक था. उसने सुलतान की शक्ति एवं प्रतिष्ठा को नए रूप में धरातल पर स्थापित की तुर्की राज्य का विस्तार किया तथा सुदृढ प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना की. उसने सुलतान नासिरूद्दीन के नायब के रूप में राज्य की अद्भुत सेवा की और विघटन शक्तियों

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रजिया सुलतान (1236-1240): भारत की पहली महिला शासिक
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रजिया सुलतान (1236-1240): भारत की पहली महिला शासिका

रजिया सुलतान दिल्ली की प्रथम और अंतिम महिला सुलतान थी. वह रुकनूद्दीन फिरोजशाह को पदच्युत कर दिल्ली का सुलतान बनी. उसने केवल चार वर्षों के लिए ही शासन किया. फिर भी उसके राज्यारोहण का सल्तनत के इतिहास में विशेष महत्व है. रजिया को राजगद्दी दिल्ली की जनता के समर्थन से प्राप्त हुई. जनता सदैव उसके

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इल्तुतमिश (1210-1236) का शासन और योगदान
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इल्तुतमिश (1210-1236) का शासन और योगदान

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद तुर्क सरदारों ने आरामशाह को सुलतान बनाया. आरामशाह अक्षम और आलसी था. इसलिए कई तुर्क सरदारों ने उसका विरोध किया. साम्राज्य में अराजकता फैल गई. वह स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहा. परिणामस्वरूप, दिल्ली के तुर्क सरदारों ने बदायूँ के गवर्नर इल्तुतमिश को दिल्ली बुलाया. इल्तुतमिश, कुतुबउद्दीन ऐबक

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कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन और गुलाम वंश का स्थापना | Qutubuddin Aibak the Founder of Ghulam or Slave Dynasty under Delhi Sultanate
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कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन और गुलाम वंश का स्थापना

कुतुबुद्दीन ऐबक का जन्म तुर्किस्तान में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. बचपन में ही उसे गुलाम बनाकर निशापुर के काजी फखरूद्दीन को बेच दिया गया. काजी ने उसकी अच्छी देखभाल की और उसे धनुर्विद्या तथा घुड़सवारी सिखाई. ऐबक ने कुरान पढ़ना भी सीखा, जिसके कारण उसे ‘कुरानख्वां’ (कुरान पाठक) के नाम से भी जाना

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दिल्ली सल्तनत का प्रशासनिक, सैन्य व कर प्रणाली
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दिल्ली सल्तनत का प्रशासनिक, सैन्य व कर व्यवस्था

दिल्ली सल्तनत का प्रशासन अरबी-फारसी पद्धति पर आधारित थी. इस प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा या सुल्तान था. यह सुल्तान खुदा के नाम पर शासन करता था. जबकि वास्तविक सत्ता सुन्नी भातृत्व भासना अथवा मिल्लत में निहित थी. चूँकि मुस्लिम शासन पद्धति धार्मिक पुस्तक कुरान पर आधारित थी और मुस्लिम जगत में पैगम्रुबर के बाद

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सिख साम्राज्य का इतिहास: उदय, विस्तार और क्षेत्र
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सिख साम्राज्य का इतिहास: उदय, विस्तार और क्षेत्र

जब मुग़ल कमजोर हुए तो देश के कई हिस्सों में स्थानीय शासकों का सत्ता स्थापित होने लगा. सिख साम्राज्य एक ऐसा ही राज्य था. इसके स्थापना का श्रेय बन्दा बहादुर को दिया जाता है. लेकिन इसके औपचारिक गठन का श्रेय महाराजा रंजीत सिंह को दिया जाता है. बंदा बहादुर: सिख साम्राज्य का प्रारंभिक नायक बंदा

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दिल्ली सल्तनत और इसके 5 वंशों के महत्वपूर्ण शासक | Delhi Sultanate Dynasties Rulers Period and Downfall
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दिल्ली सल्तनत और इसके 5 वंशों के महत्वपूर्ण शासक

दिल्ली सल्तनत का उदय 1175 और 1206 के बीच अफ़गानिस्तान के मुहम्मद गौरी द्वारा उत्तरी भारत पर आक्रमण के बाद हुआ. उनके एक सैन्य गुलाम, कुतुब अल-दीन ऐबक को दिल्ली का प्राथमिक सुल्तान बनाया गया. इस तरह कुतुबुद्दीन मामलुक परंपरा का संस्थापक बना. इसके बाद अन्य तुर्क वंश आए – खिलजी और अफ़गान लोदी वंश.

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गुप्त साम्राज्य: उद्भव, राजनीतिक विकास, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और प्रशासन
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गुप्त साम्राज्य: उद्भव, राजनीतिक विकास, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और प्रशासन

भारत के इतिहास में गुप्त साम्राज्य अपनी सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और राजनीतिक उपलब्धियों के लिए विख्यात है. चौथी शताब्दी की शुरुआत में उत्तरी भारत में व्याप्त राजनीतिक विखंडन के दौर में था. कुषाण साम्राज्य के विघटन के उपरांत छोटे राज्य और स्वायत्त इकाइयाँ अस्तित्व में थीं. इस कमजोरी का फायदा गुप्तों ने उठाया और एक समृद्ध

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