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बैटरी, तार और जलते हुए बल्ब के माध्यम से विद्युत धारा के प्रवाह को दर्शाता हुआ चित्र.
Science

विद्युत धारा (Electric Current) क्या है? प्रकार, प्रभाव और उपयोग

हम जानते हैं कि किसी धातु के भीतर बड़ी संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं. सामान्य अवस्था में ये इलेक्ट्रॉन अनियमित (Random) गति करते रहते हैं. इस कारण इनकी कुल गति किसी एक निश्चित दिशा में नहीं होती और धातु में विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती. जब किसी चालक (Conductor) के सिरों के बीच […]

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लॉर्ड विलियम बेंटिक का इन्फोग्राफिक, जिसमें सती प्रथा उन्मूलन (1829), चार्टर एक्ट 1833, अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत (1835), ठगों का दमन तथा प्रशासनिक एवं न्यायिक सुधार दर्शाए गए हैं.
History

लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828-1835): जीवनी, शैक्षणिक, सामाजिक और प्रशासनिक सुधार

लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828-1835) भारत के गवर्नर जनरल थे. उन्हें भारत में सामाजिक सुधारों की शुरुआत करने वाला शासक माना जाता है. उनके कार्यकाल में सती प्रथा का उन्मूलन, अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत, प्रशासनिक सुधार तथा चार्टर एक्ट 1833 जैसे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए. इसलिए UPSC, SSC, PCS और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उनसे संबंधित प्रश्न

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आचार्य विनोबा भावे : जीवन और योगदान
History

आचार्य विनोबा भावे और भूदान आंदोलन

विनोबा भावे का पूरा नाम विनायक नरहरि भावे था. उन्हें आचार्य विनोबा भावे के नाम से भी जाना जाता है. वे महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मण परिवार से संबंध रखते थे. बचपन से ही वे गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अत्यंत प्रतिभाशाली थे. उन्हें कई भाषाओं का अच्छा ज्ञान था. 20 वर्ष की आयु में

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होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता | Home Rule League Movement and Lucknow Pact (1916)
History

होमरूल आंदोलन एवं लखनऊ समझौता (1916)

होमरूल आंदोलन को होमरूल लीग आंदोलन भी कहा जाता है. यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक अहम् उत्थान है. इसलिए प्रतियोगी परीक्षार्थियों समेत अन्य शिक्षार्थियों व जनसामान्य को इसका जानकारी होना ऐतिहासिक पहलुओं के समझ के लिए आवश्यक है. तो आइए हम इस आंदोलन के पृष्ठभूमि, अवधारणाएं विकास, प्रभाव और परिणामों का विस्तृत

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ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र
History

ऐतिहासिक कामरूप राज्य : प्राचीन भारत के उत्तर-पूर्व का शक्तिशाली एवं सांस्कृतिक क्षेत्र

प्राचीन भारत के इतिहास में कामरूप राज्य (State of Kamrup) का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। उत्तर-पूर्व भारत के इतिहास, संस्कृति, धर्म, राजनीति तथा सभ्यता के विकास में इस राज्य की केंद्रीय भूमिका रही है। कामरूप केवल एक सीमांत राज्य नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और उत्तर-पूर्व की जनजातीय परम्पराओं के समन्वय का महान केन्द्र

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कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक मोड़
History

कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वैचारिक संघर्ष

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रारम्भिक चरण में, जब राष्ट्रवादी चेतना तेज़ी से विकसित हो रही थी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं, दिसंबर 1907 में कांग्रेस का सूरत विभाजन हुआ। यह घटना केवल संगठनात्मक टूट नहीं थी, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उदारवादी (नरमपंथी) और उग्रवादी (अतिवादी) विचारधाराओं के गहरे वैचारिक संघर्ष का परिणाम

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बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति
History

बंगाल विभाजन 1905 और ब्रिटिश रणनीति

बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के समय की एक बड़ी परिघटना है. लार्ड कर्जन का कार्यकाल भारत मे प्रतिक्रियावादी साम्राज्यवादी चालों के लिए जाना जाता है. कर्जन का दिमाग हर उस मुद्दे की ओर आकर्षित होता था जिससे भारतीय राष्ट्रीयता तथा भारत की अखंडता पर आघात किया जा सके. लार्ड कर्जन ने बंगाल की अखंडता पर

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प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व | Battle of Plassey Reasons Incidents and Aftermath in HIndi
History

प्लासी युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण, घटनाएं, परिणाम व महत्व

प्लासी युद्ध के शुरुआत के कई छिपे रहस्य थे. रॉबर्ट क्लाइव, सिराजुद्दौला को बंगाल की गद्दी से उतारने की अपनी योजना को अंतिम रूप देने में लगा हुआ था. उसने नवाब सिराजुद्दौला को एक पत्र लिखा, जिसमें उस पर अलीनगर की संधि (फरवरी 1757) को तोड़ने और फ्रांसीसियों के साथ साठगांठ करने जैसे विभिन्न आरोप

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भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़
History

भारत छोड़ो आंदोलन (1942): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़

1942 का भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement – QIM in Hindi) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में कॉंग्रेस द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध छेड़ा गया तीसरा और सबसे निर्णायक जन-आंदोलन था. इस व्यापक संघर्ष ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक अपरिहार्य मोड़ पर ला दिया.

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