विश्व के प्रमुख द्वीप समूह पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
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भारत में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत औपनिवेशिक काल में हुई, जब 1904 में सहकारी ऋण समिति अधिनियम पारित हुआ. इसका उद्देश्य किसानों को साहूकारों के शोषण से बचाना था. यह आंदोलन यूरोपीय मॉडल, विशेष रूप से जर्मनी के रायफाइज़न मॉडल से प्रेरित था. वैश्विक सहकारी आंदोलन की नींव 1844 में रोशडेल पायनियर्स ने लंकाशायर, इंग्लैंड
भारत का सहकारिता आंदोलन, उद्भव, विकास, स्तर और गुण-दोष Read More »
मानव विकास सूचकांक (HDI) एक संयुक्त सूचकांक है, जो किसी देश के मानव विकास की औसत उपलब्धियों को तीन आधारभूत आयामों के आधार पर मापता है. ये आयाम हैं: (i) दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन, (ii) ज्ञान प्राप्त करना, और (iii) शिष्ट व शालीन जीवन जीना. इनका मापन निम्नलिखित तरीकों से होता है: मानव विकास सूचकांक:
मानव विकास सूचकांक (HDI) की अवधारणा, इतिहास और भारत Read More »
पूर्ति या आपूर्ति (Supply) से तात्पर्य उस वस्तु की मात्रा से है, जिसे विक्रेता एक निश्चित समय और निश्चित कीमत पर बाजार में बेचने को तैयार हो. उदाहरण: “बाजार में 1,000 क्विंटल गेहूँ की पूर्ति” कहना अपूर्ण है, क्योंकि इसमें समय और कीमत का उल्लेख नहीं है. लेकिन “आज 250 रु./क्विंटल पर 1,000 क्विंटल गेहूँ
आपूर्ति का अवधारणा, प्रभावित करने वाले कारक और अपवाद Read More »
भारतीय संविधान निर्माताओं ने ऐतिहासिक अनुभवों और वैश्विक घटनाओं से सीख ली. इसलिए, उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन प्रावधान जोड़े. इसके कारण प्रशासनिक तंत्र के विफल होने पर, भारतीय संघीय ढाँचे का एकात्मक प्रणाली में परिवर्तित होने की क्षमता है. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे अद्वितीय बताया है.
भारत के राजव्यवस्था में उपराष्ट्रपति एक संवैधानिक पद हैं, जो अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति का प्रावधान हैं. अनुच्छेद 63 से 73 तक उपराष्ट्रपति के प्रावधान, अर्हताएं, निर्वाचन, कार्य, दायित्व, पदावधि और पदच्युति का उल्लेख हैं. वरीयता में उपराष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च पद
भारत के उपराष्ट्रपति, शक्तियां, अनुच्छेद, चुनाव, जिम्मेदारियाँ Read More »
नमस्कार दोस्तों! इस लेख के माध्यम से हम संक्षिप्त में केंद्र-राज्य संबंधों की प्रकृति और विस्तार से केंद्र-राज्य संबंधों के लिए स्थापित विभिन्न आयोगों या समितियों के संस्तुतियों को जानेंगे. केंद्र-राज्य सम्बन्ध की प्रकृति केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संघवाद की बुनियाद हैं और राष्ट्रीय एकता तथा विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भारतीय
केंद्र-राज्य सम्बन्ध पर विभिन्न आयोग और समितियों की सिफारिशें Read More »