मनुष्य के जीवन में शिक्षा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, चरित्र, व्यवहार और व्यक्तित्व का विकास करती है. शिक्षा का अर्थ शिक्षा के लिये प्रयुक्त अँग्रेजी शब्द एजुकेशन (Education) पर विचार करें तो भी उसका यही अर्थ निकलता है. इसके अंग्रेजी शब्द Education की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द Educatum से हुई है. Education का अर्थ शिक्षण की कला. ‘‘एजूकेशन’’ शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के तीन शब्दों से मानी गयी है.
- एजुकेटम – इसका अर्थ है- शिक्षण की क्रिया
- एजुकेयर – शिक्षा देना- ऊपर उठाना, उठाना
- एजुसियर – आगे बढ़ना
सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि शिक्षा का अर्थ है- प्रशिक्षण, संवर्द्धन और पथ-प्रदर्शन करने का कार्य.
शिक्षा क्या है?
शिक्षा मनुष्य के जीवन को सही दिशा देने की प्रक्रिया है. यह केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, व्यवहार और सोच का विकास भी करती है. शिक्षा से नैतिक मूल्यों, सामाजिक समझ और व्यक्तित्व का निर्माण होता है. यही कारण है कि शिक्षा को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है.
विभिन्न शिक्षाविदों द्वारा शिक्षा का परिभाषा
शिक्षा मानव जीवन का महत्वपूर्ण आधार है. अलग-अलग विद्वानों और शिक्षाविदों ने शिक्षा को अपने अनुभव और दृष्टिकोण से समझाया है. किसी ने शिक्षा को आत्म-विकास का साधन माना, तो किसी ने समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बताया. इसी कारण शिक्षा की परिभाषा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं मानी जाती.
जगतगुरु शंकराचार्य के अनुसार –
“स: विद्या या विमुक्तये.”
अर्थात वास्तविक शिक्षा वही है, जो मनुष्य को अज्ञान और बंधनों से मुक्त करे.
स्वामी विवेकानन्द ने शिक्षा को मनुष्य की आंतरिक शक्ति से जोड़ा. उनके अनुसार –
“मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है.”
महात्मा गांधी ने शिक्षा को सर्वांगीण विकास का माध्यम माना. उनके शब्दों में –
“शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है.”
प्लेटो ने शिक्षा के द्वारा शरीर और आत्मा दोनों के विकास पर बल दिया. वहीं उनके शिष्य अरस्तू के अनुसार –
“स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निर्माण ही शिक्षा है.”
भौतिकवादी चार्वाकों के अनुसार –
“शिक्षा वह है जो मनुष्य को सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने योग्य बनाती है.”
हरबर्ट स्पेन्सर ने शिक्षा को जीवन से जोड़ते हुए कहा –
“शिक्षा का अर्थ अन्तः शक्तियों का बाह्य जीवन से समन्वय स्थापित करना है.”
सुकरात के अनुसार –
“शिक्षा का अर्थ प्रत्येक मनुष्य के मस्तिष्क में अदृश्य रूप से विद्यमान विचारों को प्रकाश में लाना है.”
एडिसन ने कहा –
“शिक्षा मानव मस्तिष्क को प्रभावित करती है और उसके गुणों को पूर्णता तक विकसित करती है.”
फ्राबेल के अनुसार –
“शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक की जन्मजात शक्तियाँ बाहर प्रकट होती हैं.”
टी.पी. नन के अनुसार –
“शिक्षा व्यक्तित्व का पूर्ण विकास है, जिससे व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार मानव जीवन में योगदान दे सके.”
पेस्टालॉजी ने शिक्षा को स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया माना. उनके अनुसार –
“शिक्षा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक, सामंजस्यपूर्ण और प्रगतिशील विकास है.”
जेम्स के अनुसार –
“शिक्षा कार्य सम्बन्धी अर्जित आदतों का संगठन है, जो व्यक्ति को उसके सामाजिक और भौतिक वातावरण में उचित स्थान प्रदान करता है.”
हार्न के अनुसार –
“शिक्षा मानव के शारीरिक, मानसिक और संवेगात्मक विकास द्वारा वातावरण से उत्तम सामंजस्य स्थापित करती है.”
ब्राउन के अनुसार –
“शिक्षा एक नियंत्रित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन लाया जाता है.”
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा –
“शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वो दहाड़ेगा.”
इन सभी विचारों से स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है. यह मनुष्य के व्यक्तित्व, चरित्र, विचार और जीवन मूल्यों का निर्माण भी करती है.
शिक्षा के अंग
शिक्षा के अंग – शिक्षा प्रक्रिया के मुख्यत: दो अंग होते हैं- एक सीखने वाला और दूसरा सिखाने वाला.
1. शिक्षार्थी –
यह शिक्षा प्रक्रिया का सबसे पहला और मुख्यतम अंग होता है. शिक्षार्थी की अनुपस्थिति में शिक्षा की प्रक्रिया चलने का केाई प्रश्न ही नहीं. शिक्षा अपनी रूचि, रूझान और योग्यता के अनुसार ही सीखता है. सीखने की क्रिया शिक्षार्थी के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, उसकी अभिवृद्धि, विकास एवं परिपक्वता और सीखने की इच्छा, पूर्व अनुभव, नैतिक गुणों, चरित्र, बल, उत्साह, थकान एवं उसकी अध्ययनशीलता पर निर्भर करती है.
2. शिक्षक –
शिक्षा के व्यापक अर्थ में हम सब एक दूसरे को प्रभावित करते हैं सीखते हैं. इसलिये हम सभी शिक्षार्थी और सभी शिक्षक हैं. परन्तु संकुचित अर्थ में कुछ विशेष व्यक्ति, जो जान बूझकर दूसरों को प्रभावित करते हैं और उनके आचार-विचार में परिवर्तन करते हैं, शिक्षक कहे जाते हैं. शिक्षक के बिना नियोजित शिक्षा की कल्पना आज भी सम्भव नहीं है. शिक्षक बालक के विकास में पथ-प्रदर्शक का कार्य करता है.
शिक्षा के प्रकार
व्यवस्था की दृष्टि से शिक्षा के तीन रूप है- औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक.
1. औपचारिक शिक्षा-
वह शिक्षा जो विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में दी जाती है, औपचारिक शिक्षा कही जाती है. इसके उद्देश्य, पाठ्यचर्या और शिक्षण विधियां सभी निश्चित होते हैं. यह योजनाबद्ध हेाती है .
2. अनौपचारिक शिक्षा-
वह शिक्षा जिसकी याजेना नहीं बनायी जाती न ही निश्चित उद्देश्य होते हैं, न पाठ्यचर्या और न शिक्षण विधियॉ और जो आकस्मिक रूप से सदैव चलती रहती हैं उसे अनौपचारिक शिक्षा कहते हैं. इस प्रकार की शिक्षा मनुष्य के जीवन भर चलती रहती है. परिवार एवं समुदाय में रहकर हम जो सीखते हैं उसमें से वह सब जो समाज हमें सिखाना चाहता है अनौपचारिक शिक्षा की कोटि में आता है.
3. निरौपचारिक शिक्षा-
इस शिक्षा का उद्देश्य, पाठ्यचर्या और शिक्षण विधियां प्राय: निश्चित होते हैं, परन्तु औपचारिक शिक्षा की भांति कठोर नहीं होते. यह शिक्षा लचीली होती है. इसका उद्देश्य प्राय: सामान्य शिक्षा का प्रसार और सतत् शिक्षा की व्यवस्था करना होता है. इस पाठ्यचर्या को सीखने वालों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निश्चित की जाती है. समय व स्थान भी सीखने वालों की सुविधा को ध्यान में रखकर निश्चित किया जाता है. यह शिक्षा व्यक्ति की शिक्षा को निरन्तरता प्रदान करने का कार्य करती है. निरौपचारिक शिक्षा के भी अनेक रूप हैं. जैसे प्रौढ़ शिक्षा, खुली शिक्षा, दूर शिक्षा और जीवन पर्यन्त शिक्षा अथवा सतत् शिक्षा.
| आधार | औपचारिक शिक्षा | अनौपचारिक शिक्षा | निरौपचारिक शिक्षा |
|---|---|---|---|
| स्थान | विद्यालय | घर/समाज | प्रशिक्षण केंद्र |
| पाठ्यक्रम | निश्चित | अनिश्चित | सीमित |
| प्रमाणपत्र | मिलता है | नहीं | कभी-कभी |
आधुनिक शिक्षा के प्रकार
समय के साथ मानव सभ्यता और आवश्यकताओं में भारी बदलाव आया है, जिसके कारण शिक्षा का पारंपरिक स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है. आज की तीव्र गति से भागती दुनिया, उन्नत तकनीक और वैश्विक आवश्यकताओं (Global Needs) ने शिक्षा के कई नए और आधुनिक प्रकारों को जन्म दिया है.
आधुनिक शिक्षा के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
4. ऑनलाइन शिक्षा (Online Education)
ऑनलाइन शिक्षा आज के डिजिटल युग की रीढ़ बन चुकी है. यह इंटरनेट, स्मार्ट गैजेट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदान की जाने वाली शिक्षा है.
आज के समय में छात्र मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर लाइव क्लासेस, रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर्स और ई-बुक्स के माध्यम से पढ़ सकते हैं. ज़ूम (Zoom), गूगल मीट, विभिन्न एजुकेशनल ऐप्स (जैसे Coursera, Udemy) और यूट्यूब.
इसने शिक्षा को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त कर दिया है. छात्र अपनी सुविधा के अनुसार समय चुनकर पढ़ाई कर सकते हैं, जिससे समय और यात्रा के खर्च की भारी बचत होती है.
5. दूरस्थ शिक्षा (Distance Education / Open Learning)
दूरस्थ शिक्षा (Distance Learning) उन शिक्षार्थियों के लिए एक वरदान है जो किसी कारणवश रोज़ाना स्कूल या कॉलेज (नियमित कक्षाओं) में उपस्थित नहीं हो सकते.
इस प्रणाली में छात्र घर बैठे ही अपना पंजीकरण कराते हैं. शिक्षण संस्थान उन्हें अध्ययन सामग्री (Books & Study Material) डाक द्वारा, ईमेल द्वारा या अपने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराते हैं. परीक्षाएँ आमतौर पर निर्धारित केंद्रों पर या ऑनलाइन आयोजित की जाती हैं. जैसे, इग्नू (IGNOU) और विभिन्न मुक्त विश्वविद्यालय (Open Universities).
यह नौकरीपेशा लोगों, गृहिणियों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल करने का बेहतरीन अवसर देती है.
6. तकनीकी शिक्षा (Technical Education)
तकनीकी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, उपकरणों और व्यावहारिक (Practical) कार्यों का गहन ज्ञान देना है. यह केवल थ्योरी (किताबी ज्ञान) तक सीमित नहीं होती.
इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्किटेक्चर और मशीनरी से संबंधित विषयों की पढ़ाई कराई जाती है. इसमें प्रयोगशालाओं (Labs) और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स पर विशेष जोर दिया जाता है.
यह शिक्षा देश के औद्योगिक और तकनीकी विकास का आधार है. यह छात्रों में तार्किक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem Solving Skills) को विकसित करती है.
7. व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education)
व्यावसायिक शिक्षा का सीधा संबंध रोजगार और आत्मनिर्भरता से है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किसी विशेष उद्योग, शिल्प या व्यवसाय के लिए व्यावहारिक रूप से कुशल (Skill-based) बनाना है.
इसमें किताबी ज्ञान से ज्यादा ‘काम सीखने’ पर ध्यान दिया जाता है. इसके तहत होटल मैनेजमेंट, डिजिटल मार्केटिंग, फैशन डिजाइनिंग, ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन और नर्सिंग जैसे शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कोर्सेज कराए जाते हैं. (जैसे ITI और पॉलिटेक्निक कोर्सेज).
यह शिक्षा युवाओं को सीधे रोजगार या स्वरोजगार (खुद का बिजनेस) शुरू करने के काबिल बनाती है, जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या कम होती है और व्यक्ति आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनता है.
संक्षेप में कहा जाए तो आधुनिक शिक्षा के ये विभिन्न प्रकार पारंपरिक शिक्षा की कमियों को दूर करते हैं. ये न केवल व्यक्ति के ज्ञान और कौशल (Skills) को निखारते हैं, बल्कि उसके समग्र व्यक्तित्व का विकास कर उसे आज के प्रतिस्पर्धी युग में सफल होने के योग्य बनाते हैं.
शिक्षा के उद्देश्य
शिक्षा का उद्देश्य देश और काल के अनुरूप बदलता रहता है, शिक्षा के कुछ सर्वमान्य उद्देश्य है –
- मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास करना.
- शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य सतुंलित व्यक्तित्व का विकास करना भी है.
- शिक्षा का अति महत्वपूर्ण उद्देश्य चरित्र का निर्माण एवं उसका नैतिक विकास करना है
- मानव जीवन में शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति को आत्म निर्भर बनाना है. ऐसा व्यक्ति समाज के लिये भी सहायक होता है, जो अपना भार स्वयं उठा लेता है.
- शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बच्चों को जीवन के लिये तैयार करना है.
आधुनिक शिक्षा की विशेषताएँ
समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में कई बदलाव आए हैं. पहले शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास करना है. आज की शिक्षा विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करती है.
1. छात्र केंद्रित शिक्षा
आधुनिक शिक्षा में विद्यार्थी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. शिक्षक केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं. इससे छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता विकसित होती है.
2. कौशल आधारित शिक्षा
आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं मानी जाती. आधुनिक शिक्षा में संचार कौशल, समस्या समाधान, नेतृत्व और तकनीकी ज्ञान जैसे कौशलों पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
3. डिजिटल शिक्षा
इंटरनेट और तकनीक ने शिक्षा को आसान और सुलभ बना दिया है. ऑनलाइन कक्षाएँ, स्मार्ट क्लास और ई-लर्निंग आधुनिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं.
4. समावेशी शिक्षा
आधुनिक शिक्षा सभी बच्चों को समान अवसर देने पर बल देती है. इसमें जाति, वर्ग, भाषा या शारीरिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता.
5. व्यावसायिक शिक्षा
आज की शिक्षा विद्यार्थियों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए भी तैयार करती है. तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण को आधुनिक शिक्षा में विशेष महत्व दिया गया है.
6. जीवन कौशल पर जोर
आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं है. यह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग और नैतिक मूल्यों का विकास भी करती है.
इस प्रकार आधुनिक शिक्षा व्यक्ति को ज्ञानवान, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने का कार्य करती है.
शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व
हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में शिक्षा की आवश्यकता है. शिक्षा ही बच्चे की जानवर प्रवृत्ति को मानव प्रवृत्ति में बदलती है.
- शिक्षा वृद्धि एवं विकास के साथ-साथ परिपक्वता के लिए भी आवश्यक है.
- शिक्षा उसके जीवन में नैतिक, आध्यात्मिक चरित्र निर्माण तथा उच्च स्तर के मूल्यों के व्यवहार के लिए शिक्षा देती है.
- शिक्षा तात्कालिक तथा अंतिम दोनों शैक्षिक लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए महत्वपूर्ण है.
- यह आर्थिक रूप से आत्मसंतुष्ट, आत्मनिर्भर एवं आत्मावलंबी बनाती है.
- शिक्षा मौलिक आवश्यकता के लक्ष्य को पूर्ण करती है.
- यह व्यक्तियों में बौद्धिक तथा भावनात्मक शक्तियों का विकास करती है ताकि व्यक्ति जीवन की समस्याओं के सफलतापूर्वक समाधान करने के योग्य हो जाए.
- शिक्षा व्यक्ति में सामाजिक गुणों जैसे सेवा, सहिष्णुता, सहयोग, सहानुभूति तथा संवैधानिक मूल्यों का विकास करती है.
- शिक्षा हमें राष्ट्र के लिए प्रेम एवं राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करना सिखाती है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू की गई. इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाना है. यह नीति विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास पर विशेष जोर देती है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि कौशल विकास और व्यवहारिक शिक्षा को भी महत्व दिया गया है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना है.
इस नीति में मातृभाषा में शिक्षा देने पर भी बल दिया गया है. प्रारम्भिक कक्षाओं में बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा या मातृभाषा में पढ़ाने की बात कही गई है. इससे बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है.
नई शिक्षा नीति में बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है. अब विद्यार्थी विज्ञान, कला और वाणिज्य जैसे विषयों को अपनी रुचि के अनुसार साथ में पढ़ सकते हैं. इससे विद्यार्थियों को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है.
डिजिटल शिक्षा को भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग और तकनीकी साधनों के माध्यम से शिक्षा को अधिक सरल और सुलभ बनाने का प्रयास किया गया है.
इस प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य कर रही है. यह नीति विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ कौशल, नैतिकता और आत्मविश्वास प्रदान करने पर बल देती है.
Infographics on Education in Hindi

निष्कर्ष
शिक्षा मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है. यह केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का साधन भी है. शिक्षा मनुष्य को सही और गलत में अंतर समझने की क्षमता देती है.
एक शिक्षित व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. यही कारण है कि शिक्षा को सफल और सभ्य जीवन की कुंजी माना जाता है. वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गया है. इस प्रकार शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के विकास के लिए आवश्यक है.
FAQ
1. शिक्षा क्या है?
शिक्षा वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति ज्ञान, नैतिकता, व्यवहार और जीवन मूल्यों को सीखता है. यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
2. शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति का मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और नैतिक विकास करना है. यह मनुष्य को जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाती है.
3. औपचारिक शिक्षा क्या होती है?
औपचारिक शिक्षा विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार दी जाती है. इसमें परीक्षा और प्रमाणपत्र की व्यवस्था भी होती है.
4. शिक्षा का महत्व क्या है?
शिक्षा व्यक्ति को ज्ञानवान, आत्मनिर्भर और संस्कारी बनाती है. यह समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है.
5. शिक्षा कितने प्रकार की होती है?
सामान्य रूप से शिक्षा के तीन मुख्य प्रकार माने जाते हैं – औपचारिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा और निरौपचारिक शिक्षा. आधुनिक समय में ऑनलाइन और तकनीकी शिक्षा का महत्व भी बढ़ा है.
6. आधुनिक शिक्षा की विशेषताएँ क्या हैं?
आधुनिक शिक्षा में कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, समावेशी शिक्षा और व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जीवन और रोजगार दोनों के लिए तैयार करना है.
7. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाना है. यह कौशल विकास और बहुविषयक शिक्षा पर बल देती है.



