प्रिय पाठकों! पियदस्सी डॉट इन में आपका स्वागत है. आज हम इस लेख वायुमंडल किसे कहते हैं? वायुमंडल की परतों के नाम (लेयर ऑफ एटमॉस्फियर इन हिंदी) के अंतर्गत वायुमंडल की संगठन, संरचना, वायुमंडल की परतों के नाम एवं वायुमंडल के महत्व के बारे में विशेष जानकारी प्राप्त करेंगे जो निम्नलिखित इस प्रकार हैं:-
आपने रस्सी या तार पर टंगे कपड़े को हिलते देखा होगा, चलते हुए पंखे के नीचे किताबों के पन्ने को फड़फड़ाते हुए देखा होगा, पेड़ की पत्तियों को भूलते हुए देखा होगा और बहुत कुछ. यह सब कुछ गतिशील वायु के कारण होते हैं, जिसे हम आमतौर पर हवा भी कहते है.
हवा एक पारदर्शी गैसीय आवरण है, पृथ्वी के चारों तरफ एक परत बनाकर मौसमी परिवर्तन, श्वसन समेत कई प्रकार के क्रियाकलापों में सहयोग करता है. हवा के पृथ्वी के चारों तरफ इसी परत को वायुमंडल कहते है. आगे हम जानेंगे:
वायुमंडल किसे कहते हैं (What is Atmosphere in Hindi)?
पृथ्वी के चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं. वायुमंडल हमारे पृथ्वी का एक अभिन्न अंग है. जो पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण कारण पृथ्वी से जुड़ा हुआ है. वायु जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण भाग है.
वायु के बिना कोई भी जीव जीवित नहीं रह सकता. यह जीवन केे लिए हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकने तथा जीवन केेे लिए अनुकूूल तापमान बनाएं रखने में सहायक है. वायु का 99% भाग, वायुमंडल के 32 किलोमीटर की ऊंचाई में ही पाया जाता है. यूं कहे तो पृथ्वी केे इर्द-गिर्द वायु का भंडार है.
वायुमंडल की संरचना
वायुमंडल में गैसों का मिश्रण है. गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प तथा धूल कण भी उपस्थित है.
• नाइट्रोजन पूरे वायुमंडल के आयतन का 78.07% भाग है. नाइट्रोजन की उपस्थिति के कारण ही वायुदाब, पवनों की शक्ति तथा प्रकाश के परिवर्तन का आभास होता है. नाइट्रोजन का सबसे बड़ा लाभ दिया है कि वह वस्तुओं को तेजी से जलने से बचाती है.
• ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में 64 किलोमीटर तक फैली हुई है. यह जीवनदायिनी गैस मानी जाती है ऑक्सीजन के अभाव में हम इंधन नहीं जला सकते हैं.
• आर्गन वायुमंडल का केवल 0.93% भाग है और वायुमंडल मंडल की निचली परतो में पाई जाती है. आर्गन एक अक्रिय गैस है.
• कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल का केवल 0.03% होते हुए भी यह एक महत्वपूर्ण गैस है.
ओजोन वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है किंतु सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करने के कारण महत्वपूर्ण है. पृथ्वी की सतह से 20 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच ओजोन पाई जाती है.
• सुपरसोनिक जेट विमानों से निकली हुई नाइट्रोजन ऑक्साइड और एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर आदि से निकली हुई क्लोरोफ्लोरोकार्बन इसी परत को काफी क्षति पहुंचा रही है.
वायुमंडल का संगठन
वायुमंडल विभिन्न प्रकार की गैस जलवाष्प और धूलकण विभिन्न प्रकार के गैसों का संगठन है. नाइट्रोजन और ऑक्सीजन वायुमंडल की दो प्रमुख कैसे हैं. 99% भाग इन्हीं दो गैसों से मिलकर बना हुआ है. शेष 1% भाग में अन्य सभी गैस जैसे – आर्गन, कार्बन-डाइऑक्साइड हाइड्रोजन एवं हीलियम आदि गैस है.
- नाइट्रोजन – 78.1%
- ऑक्सीजन – 20.9%
- आर्गन – 0.9%
- कार्बन डाइऑक्साइड – 0.03%
- हाइड्रोजन – 0.01%
- नियोन – 0.0018%
- हीलियम – 0.0005%
- ओजोन – 0.00006%
- अन्य – ×××
- कुल – 99.99%
वायुमंडल का रासायनिक संगठन
वायुमंडल को रासायनिक संगठन के आधार पर सम मंडल तथा विषम मंडल, दो भागों में विभाजित किया जाता है. सम मंडल की रचना मुख्य रूप से ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन से हुई है. तापमान के आधार पर इसमें क्षोभ मंडल समताप मंडल तथा मध्य मंडल पाए जाते हैं. विषम मंडल की ऊंचाई 90 किलोमीटर से 10000 किलोमीटर तक पाई जाती है. इसमें आण्विक नाइट्रोजन परत, आण्विक ऑक्सीजन परत, हिलियम परत तथा आण्विक हाइड्रोजन परत पाई जाती है.
वायुमंडल की परतों के नाम (Layers of Atmosphere in Hindi)
- क्षोभमंडल (Troposphere) : 0-16 किमी.
- समतापमंडल (Stratosphere) : ट्रोपोपॉज से 50 किमी.
- मध्यमंडल (Mesosphere) : 50-80 किमी.
- अयानमंडल (Ionosphere) : 80-690 किमी.
- बाह्यमंडल (Exosphere) : 690 किमी. से उपर
1. क्षोभमंडल (Troposphere)
- क्षोभमंडल को वायु मंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत माना जाता है. वायुमंडल की सबसे निचली परत है, जिसकी ऊंचाई विषुवत रेखा पर 16 किलोमीटर तथा ध्रुवों पर 8 किलोमीटर है.
- जीव जंतु इसी मंडल के द्वारा सांस लेते हैं. मौसम संबंधित सभी घटनाएं; जैसे – बादल, आंधी एवं वर्षा इसी परत में होती है.
- क्षोभमंडल परत में ऊंचाई के साथ-साथ तापमान घटता है. प्रत्येक 165 मीटर पर 1 डिग्री सी तापमान में कमी होती जाती है. जिसे सामान्य ताप ह्रास दर (Normal Lapse rate of Temperature) कहते हैं.
- क्षोभमंडल परत को संवहन मंडल भी कहते हैं क्योंकि संवाहन धाराएं इसी मंडल तक सीमित है.
- क्षोभ मंडल में निरंतर संवहनी धाराएं तथा हवाएं चला करती है, जो तापमान तथा आद्रता को काफी ऊंचाई तक गिरा देती है.
आइए जानते हैं क्षोभ सीमा क्या है?
- क्षोभमंडल की ऊपरी सीमा से लगे क्षेत्र को क्षोभ सीमा कहते है.
- क्षोभ सीमा पर वायु का तापमान भूमध्य रेखा पर -80°C तथा ध्रुव पर -45°C होता है.
- वायुमंडल के कुल भार की मात्रा का 97% भाग लगभग 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक सीमित है.
2. समतापमंडल (Stratosphere)
- समताप परत 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. इस के निचले भाग में 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक तापमान में कोई परिवर्तन नहीं होता है. जिस कारण से इसे समताप मंडल कहते हैं.
- सामान्यता समताप मंडल में बादल नहीं पाए जाते हैं परंतु कभी-कभी जलवाष्प उपलब्ध होने के कारण दुर्लभ वाद मिलते हैं जिससे मदर ऑफ पर्ल (Mother of Pearl cloud) कहते हैं.
- समतापमंडल के ऊपर 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक तापमान में वृद्धि होती है, जिसका कारण वहां उपस्थित ओजोन गैस है, जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों का अवशोषण करती है इसीलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहते हैं.
- ओजोन परत क्षरण CFC गैस से होता है जो एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर से निकलती है. CFC गैस मैं उपस्थित सक्रिय गैस क्लोरीन ओजोन परत का क्षरण करती है.
- इस परत में बादलों, धूल के कणों, बिजली की कड़क, जलवाष्प आदि कुछ भी नहीं पाया जाता है.
- इस मंडल में वायु शक्ति दिशा में चलती है. वायुयान चालकों के लिए यह एक उत्तम मंडल है.
- समतापमंडल की बाह्य सीमा को समताप सीमा कहते हैं.
3. मध्यमंडल (Mesosphere)
- समताप सीमा के ऊपर मध्यमंडल है, जिसका विस्तार 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक है. इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान गिरने लगता है और 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर तापमान -100°C रह जाता है.
- मध्यमंडल की ऊपरी सीमा को मध्यसीमा (Mesosphere) कहते हैं.
4. आयनमंडल (Ionosphere)
- मध्य मंडल सीमा के ऊपर 80-690 किलोमीटर की ऊंचाई तक आयन मंडल है. किस मंडल में उपस्थित कौन विद्युत आवेशित होते हैं. जिन्हें आयन कहते हैं, इसीलिए इस परत को आयन मंडल के नाम से जाना जाता है.
- आयन मंडल में तीन परतें (D,E,F) स्थित है जो कि पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगों को परिवर्तित करके पृथ्वी पर वापस भेज देता है. इससे रेडियो प्रसारण में सहायता मिलती है. संचार उपग्रह आयनमंडल में ही स्थित होते हैं.
- ध्रुव पर लाल रंग की ऑरोरा की चमक इसी मंडल के कारण होती है. उत्तरी प्रकाश ध्रुव तथा दक्षिणी प्रकाश ध्रुव होते हैं.
5. बाह्यमंडल (Exosphere)
- आयन मंडल के ऊपर वायुमंडल की यह सबसे ऊपरी परत है. इस मंडल में वायु काफी विरल होती है यह पृथ्वी की सतह से सबसे दूर स्थित है.
- इस मंडल का तापमान 5000°C से भी अधिक पहुंच जाता है, परंतु उस नेता का अनुभव नहीं किया जा सकता है.
- बाह्यमंडल में हाइड्रोजन एवं हीलियम गैसों की प्रधानता होती है.
वायुमंडल का महत्व (Importance of Atmosphere)
पृथ्वी पर प्राणी को जीवित रहने के लिए वायु का विशेष महत्व है. इसके अभाव में किसी प्रकार के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है. वायुमंडल विशाल कवच की तरह है. वायुमंडल में गैसों के अतिरिक्त जलवाष्प और धूलकण भी पाए जाते हैं. इसी के कारण पृथ्वी पर सभी मौसमी घटनाएं घटती रहती है.
(i) ऑक्सीजन प्राणी जगत के लिए अति महत्व पूर्ण है.
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड गैस पेड़ पौधे के लिए उपयोगी है.
(iii) वायुमंडल में विधमान धूल का वर्षा के लिए अनुकूल दशाएं पैदा करते हैं.
(iv) वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा घटती बढ़ती रहती है और प्रत्यक्ष रूप से पादप और जीव जगत को प्रभावित करती है.
(v) ओजोन सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सभी प्रकार के जीवन की रक्षा करती है.