बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटक स्थल मुख्यत: नालंदा, राजगीर, पावापुरी, पटना, बिहारशरीफ, वैशाली, गया, बोधगया, सीतामढ़ी, मुंगेर, सासाराम इत्यादि है.
बिहार एक ऐसा राज्य है, जहां सभी धर्मों एवं परंपराओं के लोगों के लिए पर्यटन के अनुकूल आकर्षण एवं अवसर उपलब्ध है. यहां की परंपराएं, रीति रिवाज, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन पद्धतियां, पर्व, मेले एवं महोत्सव पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
बिहार के धार्मिक पर्यटक स्थल एवं उनकी विशेषताएं
जहां एक ओर बोधगया, पावापुरी, राजगीर, बिहार, शरीफ, पटना, साहिब आदि अनेक धार्मिक स्थल है, वहीं दूसरी ओर नालंदा वैशाली, पटना, सासाराम आदि महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल भी है. इसके साथ ही मुंगेर, भागलपुर, बेतिया में प्राकृतिक सौंदर्य के लिए परिपूर्ण वन्य जीव अभ्यारण स्थित है.
नालंदा (Nalanda)
बिहार के नालंदा जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय भारत ही नहीं बल्कि विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में से एक है. विभिन्न विषयों दर्शनों एवं बौद्ध शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र रहा है. यहां पर देश-विदेश से हजारों छात्र अध्ययन करने आते थे.
प्रसिद्ध चीनी यात्री हेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध दर्शन, धर्म और साहित्य का अध्ययन किया था. 12 वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी ने आक्रमण करके किस विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया. इसे विश्वविद्यालय के अवशेष इसकी विशालता एवं महत्व के सूचक है.
नालंदा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने 5वीं शताब्दी ईस्वी में कराई थी.
- यह विश्वविद्यालय लगभग 700 वर्षों तक ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख वैश्विक केंद्र बना रहा.
- यहां 10,000 से अधिक विद्यार्थी तथा लगभग 2,000 आचार्य अध्ययन-अध्यापन कार्य में संलग्न थे.
- नालंदा में बौद्ध दर्शन के साथ-साथ व्याकरण, तर्कशास्त्र, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और दर्शन जैसे विषय भी पढ़ाए जाते थे।
- यहां का विशाल पुस्तकालय ‘धर्मगंज’ कहलाता था, जिसके तीन प्रमुख भाग रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक थे.
- नालंदा विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को कठिन मौखिक परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती थी.
- चीनी यात्री हेनसांग (Xuanzang) तथा इत्सिंग (Yijing) ने नालंदा में अध्ययन किया तथा इसके शैक्षणिक वैभव का विस्तृत वर्णन किया है.
- नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों को वर्ष 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्राप्त हुआ.
- आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2010 के अधिनियम के तहत की गई तथा इसका नया परिसर राजगीर में विकसित किया गया है.
- नालंदा के प्राचीन अवशेष आज भी भारत की समृद्ध शिक्षा परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की विरासत के प्रतीक माने जाते हैं.
राजगीर (Rajgir)
राजगीर का प्राचीन नाम राजगिरी या गिरिब्रज था. यह बिहार में नालंदा जिले में स्थित है. बौद्ध, जैन एवं हिंदुओं का संयुक्त तीर्थ स्थल है, जो सात पहाड़ियों छठगिरी, रत्नगिरी, सैलगिरि, सोनगिरी, उदयगिरी, वैभर गिरी एवं विपुलगिरी से घिरा हुआ है.
राजगीर में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र आम्रवन, वेणुवन, मनिआर मठ, सोन भंडार, मगध राजा जरासंध का अखाड़ा, गर्म जल कुंड हैं. राजगीर के चट्टानों में गंधक जैसे तत्व पाए जाते हैं जो इन गुंडों को गर्म रखने में सहायक है. ब्रह्मा कुंड और मखदूम कुंड यहां के दो प्रसिद्ध कुंड हैं.
राजगीर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- प्राचीन काल में राजगीर मगध साम्राज्य की पहली राजधानी था. बाद में राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की गई.
- बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान बुद्ध ने राजगीर में अनेक वर्ष बिताए तथा यहां अनेक उपदेश दिए.
- प्रथम बौद्ध संगीति (First Buddhist Council) का आयोजन बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद सप्तपर्णी गुफा (Saptaparni Cave) में किया गया था.
- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी राजगीर में कई चातुर्मास व्यतीत किए थे.
- राजगीर स्थित विश्व शांति स्तूप का निर्माण जापान के निप्पोनज़ान म्योहोजी (Nipponzan Myohoji) बौद्ध संगठन द्वारा कराया गया था.
- विश्व शांति स्तूप तक पहुंचने के लिए रोपवे (Ropeway) की सुविधा उपलब्ध है, जो राजगीर का प्रमुख पर्यटन आकर्षण है.
- राजगीर में स्थित साइक्लोपियन वॉल (Cyclopean Wall) विश्व की प्राचीनतम पत्थर की विशाल रक्षा-दीवारों में से एक मानी जाती है.
- राजगीर में आयोजित मलमास मेला (पुरुषोत्तम मास) धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
- बिहार सरकार द्वारा प्रतिवर्ष यहां राजगीर महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के कलाकार भाग लेते हैं.
- राजगीर के गर्म जलकुंडों में ब्रह्मकुंड का धार्मिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है और मकर संक्रांति सहित अन्य पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं.
पावापुरी (Pawapuri)
बिहार के नालंदा जिले में स्थित पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल है. ऐसा माना जाता है कि भगवान महावीर को निर्वाण की प्राप्ति यही हुई थी. जिसे स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था वर्तमान में वहां कमलरूपी तालाब के मध्य जल मंदिर का निर्माण किया गया है.
यहां प्रतिवर्ष दीपावली में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के अवसर पर पावापुरी में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें देश विदेश के जैन धर्मावलंबी धर्म संबंधी चर्चा करते हैं.

पावापुरी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- पावापुरी का प्राचीन नाम अपापपुरी (Apapapuri) माना जाता है, जिसका अर्थ है— पाप रहित नगर.
- जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर ने 527 ईसा पूर्व (दिगंबर परंपरा के अनुसार) यहीं निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था.
- पावापुरी में स्थित जल मंदिर एक विशाल कमल सरोवर के मध्य निर्मित है, जहां तक पत्थर के पुल के माध्यम से पहुंचा जाता है.
- जल मंदिर के समीप स्थित समोशरण मंदिर भी जैन श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है.
- भगवान महावीर के अंतिम संस्कार के बाद श्रद्धालुओं द्वारा स्मृति-स्वरूप इतनी मिट्टी ली गई कि वहां एक विशाल सरोवर का निर्माण हो गया. इसी सरोवर के मध्य बाद में जल मंदिर का निर्माण कराया गया.
- पावापुरी जैन धर्म के पाँच प्रमुख तीर्थों में से एक माना जाता है.
- दीपावली का पर्व जैन धर्म में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.
- पावापुरी बिहार के नालंदा जिले में स्थित है तथा यह राजगीर और बिहारशरीफ से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
- प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी जैन श्रद्धालु तथा पर्यटक पावापुरी के जल मंदिर और अन्य जैन तीर्थों के दर्शन के लिए यहां आते हैं.
- पावापुरी जैन धर्म की अहिंसा, तप और मोक्ष की परंपरा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.
गया (Gaya)
गया बिहार में स्थित एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक शहर है, जो तीन और से छोटी-छोटी पहाड़ियों मंगला-गौरी, शृंगा-स्थान, रामशिला एवं ब्रह्म योनि से गिरा हुआ है. यह शहर सड़क, रेल एवं वायु मार्ग द्वारा अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है, यहां एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है.
गया स्थित विष्णुपद मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्याबाई होल्कर के द्वारा कराया गया था. दंतककथाओं के अनुसार यहां फल्गु नदी के तट पर भगवान विष्णु के पैरों का निशान है. इस मंदिर के सामने फल्गु नदी के तट पर प्रति वर्ष आश्विन मास में पितृपक्ष मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में देश-विदेश के हिंदू श्रद्धालु अपने पूर्वजों को पिंडदान करने आते हैं.
गया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- गया भारत के सबसे प्राचीन एवं पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है.
- गया का उल्लेख रामायण, महाभारत, वायु पुराण, पद्म पुराण तथा विष्णु पुराण सहित अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है.
- विष्णुपद मंदिर में स्थित लगभग 40 सेंटीमीटर लंबा पदचिह्न भगवान विष्णु के चरणचिह्न के रूप में पूजनीय माना जाता है.
- फल्गु नदी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है तथा पिंडदान का विशेष महत्व इसी नदी के तट पर है.
- धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान गया में किया था.
- पितृपक्ष मेला प्रत्येक वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक आयोजित होता है और इसमें लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों का श्राद्ध एवं पिंडदान करते हैं.
- गया का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Gaya International Airport) विशेष रूप से बौद्ध देशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है.
- गया से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी.
- मंगला गौरी मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक माना जाता है और यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है.
- धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण गया, हिंदू, बौद्ध और जैन—तीनों धर्मों के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है.
बोध गया ( Bodh Gaya)
बोधगया बिहार के गया जिले में स्थित बौद्ध धर्म के अनुयायियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो गया शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर फल्गु नदी के किनारे स्थित है. यहां महाबोधि मंदिर आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
इस मंदिर का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व सम्राट अशोक ने स्तूप के रूप में करवाया था, जिसे बाद में कुशल शासक कनिष्क में भव्य एवं विशाल मंदिर का रूप प्रदान किया. इस मंदिर में पद्मासन की मुद्रा में महात्मा बुद्ध की एक विशाल मूर्ति स्थापित है.

बोधगया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- बोधगया वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान गौतम बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान (सम्यक संबोधि) की प्राप्ति हुई थी.
- बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर को वर्ष 2002 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) घोषित किया गया.
- वर्तमान महाबोधि मंदिर की ऊंचाई लगभग 55 मीटर है और यह भारत के प्राचीन ईंट-निर्मित मंदिरों में से एक माना जाता है.
- मंदिर परिसर में स्थित बोधिवृक्ष मूल वृक्ष की वंश परंपरा का माना जाता है, जिसके नीचे भगवान बुद्ध ने तपस्या की थी.
- महाबोधि मंदिर परिसर में वज्रासन (Diamond Throne) स्थित है, जिसे बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थल का प्रतीक माना जाता है.
- सम्राट अशोक ने बोधगया की यात्रा कर यहां स्तूप, स्तंभ और अन्य स्मारकों का निर्माण कराया था.
- बोधगया में थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार, तिब्बत, चीन और वियतनाम सहित अनेक देशों के बौद्ध मठ (Monasteries) स्थित हैं.
- प्रतिवर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विश्वभर से श्रद्धालु भाग लेते हैं.
- बोधगया बौद्ध धर्म के चार प्रमुख महातीर्थों (लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर) में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.
- बोधगया आज विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक, धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्रों में से एक है.
पटना (Patna)
पटना गंगा नदी के किनारे बसा बिहार की राजधानी एवं राज्य का सबसे बड़ा नगर है, जो प्राचीन काल में पाटलिपुत्र, पुस्पपुर एवं मध्य काल में अजीमाबाद आदि नामों से जाना जाता था. विश्व की सबसे प्राचीन बसे नगरों में से एक है.
पाटलिपुत्र की स्थापना हर्यक वंश के शासक अजातशत्रु ने 450 ईसवी पूर्व (लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व) में की थी. नंद, मौर्य, शुंग, गुप्त तथा पाल वंश के शासनकाल में किस नगर को संपूर्ण भारत में प्रसिद्धि मिली. यही ऐतिहासिक पाटलिपुत्र मध्यकाल में पटना के नाम से जाना जाने लगा.
पटना सिख धर्म के भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है क्योंकि इसे अंतिम श्री गुरु गोविंद सिंह का जन्म स्थान माना जाता है. गोलघर, तारामंडल, संजय गांधी जैविक उद्यान, बुद्ध स्मृति पार्क, बिहार संग्रहालय, हनुमान मंदिर, आदम कुआं, किला हाउस, शहीद स्मारक आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
पटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र था, जो प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण नगरों में से एक था.
- पाटलिपुत्र नंद, मौर्य, शुंग, गुप्त तथा पाल वंश की राजधानी रहा और लंबे समय तक भारतीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बना रहा.
- यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘इंडिका (Indica)’ में पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन किया है.
- सम्राट अशोक ने पाटलिपुत्र से ही अपने विशाल मौर्य साम्राज्य का शासन संचालित किया था.
- पटना स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब सिख धर्म के पाँच तख्तों में से एक है और यही दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्मस्थान है.
- गोलघर का निर्माण वर्ष 1786 में ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने अकाल के समय अनाज भंडारण के लिए कराया था.
- बिहार संग्रहालय तथा पटना संग्रहालय राज्य के इतिहास, कला और पुरातत्व से संबंधित दुर्लभ धरोहरों के लिए प्रसिद्ध हैं.
- पटना में स्थित अगम कुआँ को मौर्यकालीन अवशेष माना जाता है और इसे सम्राट अशोक के शासनकाल से जोड़ा जाता है.
- बुद्ध स्मृति पार्क का निर्माण भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 2550वें वर्ष की स्मृति में कराया गया था.
- पटना आज बिहार का राजनीतिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र होने के साथ-साथ पूर्वी भारत के प्रमुख महानगरों में भी शामिल है.
वैशाली (Vaishali)
वैशाली में ही विश्व के प्रथम गणतंत्र स्थापित हुआ था, जिसकी स्थापना लिछवी शासक ने की थी. वैशाली भगवान महावीर की जन्मस्थली होने के कारण जैन धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र नगरी है.
वैशाली में अशोक स्तंभ, बौद्ध स्तूप, जैन मंदिर, प्राचीन तालाब, कमल बावन पोखर मंदिर, राजा विशाल का गढ़, हरि कटोरा मंदिर तथा जापान के निप्पोन जी समुदाय द्वारा निर्मित विश्व शांति स्तूप पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र हैं.
वैशाली से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- वैशाली विश्व के प्रथम गणराज्य (Republic) के रूप में प्रसिद्ध है, जहां वज्जि (वृज्जि) संघ का शासन था और लिच्छवि उसका प्रमुख गण था.
- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कुंडग्राम (कुंडलपुर), वैशाली में हुआ था.
- भगवान बुद्ध ने वैशाली की अनेक यात्राएं कीं तथा यहीं अपना अंतिम उपदेश दिया था.
- द्वितीय बौद्ध संगीति (Second Buddhist Council) का आयोजन भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के लगभग 100 वर्ष बाद वैशाली में हुआ था.
- वैशाली स्थित अशोक स्तंभ लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है तथा इसके शीर्ष पर एकमुखी सिंह की प्रतिमा स्थापित है.
- वैशाली का राजा विशाल का गढ़ प्राचीन गणराज्य की सभा और प्रशासनिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है.
- अभिषेक पुष्करणी वह पवित्र सरोवर है, जहां लिच्छवि शासकों का राज्याभिषेक किया जाता था.
- वैशाली में स्थित विश्व शांति स्तूप का निर्माण जापान के निप्पोनज़ान म्योहोजी बौद्ध संगठन द्वारा कराया गया है.
- वैशाली के पुरातात्त्विक अवशेष भारत के प्राचीन लोकतांत्रिक शासन, बौद्ध और जैन संस्कृति के महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं.
- वैशाली आज बौद्ध, जैन और इतिहास प्रेमियों के लिए बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में से एक है.
सीतामढ़ी (Sitamarhi)
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित पुनौरा नामक स्थान पर मिथिला नरेश जनक को ऋषि मुनियों ने हलेस्टी याद कर अपने हाथों से हल चलाने का परामर्श दिया. जब राजा जनक ने हल चलाना आरंभ किया तो हल के सीराऊंर से एक घड़ी की प्राप्ति हुई जिससे एक कन्या रूपी रत्न की प्राप्ति हुई.
हल के सिराऊंर से उत्पन्न होने के कारण इस कन्या रूपी रत्न का नाम सीता पड़ा. भूमि पुत्री सीता के नाम पर ही इस जिले का नाम सीतामढ़ी पड़ा.
सीतामढ़ी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल जानकी अस्थान मंदिर, हलेश्वर स्थान, बगही मठ, उर्बीजा कुंड एवं पंथ पाखड़ है.
सीतामढ़ी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मस्थली के रूप में व्यापक मान्यता प्राप्त है.
- पुनौरा धाम (पुनौराधाम) वह स्थान माना जाता है, जहां राजा जनक को भूमि से बालिका सीता प्राप्त हुई थीं.
- जानकी स्थान मंदिर सीतामढ़ी का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है.
- हलेश्वर स्थान मंदिर का संबंध मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा किए गए हलयज्ञ (हल-पूजन) से माना जाता है.
- उर्वीजा कुंड (Urvija Kund) को माता सीता के प्रकट होने के स्थान के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है.
- विवाह पंचमी तथा राम नवमी के अवसर पर सीतामढ़ी में विशाल धार्मिक उत्सव और मेले आयोजित किए जाते हैं.
- सीतामढ़ी भारत-नेपाल रामायण सर्किट का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है.
- यह जिला नेपाल के जनकपुर धाम से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है, जहां भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न होने की मान्यता है.
- सीतामढ़ी की सांस्कृतिक पहचान मिथिला संस्कृति, मैथिली भाषा, लोकगीत, मधुबनी कला और रामायण परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है.
- धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व के कारण सीतामढ़ी बिहार के प्रमुख रामायण पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है.
मुंगेर (Munger)
मुंगेर का उल्लेख प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक तीनों युगों में किसी न किसी रूप में मिलता है. हिंदू महाकाव्य महाभारत के दिग्विजय पर्व एवं सभा वर्ष में मोदगिरी के नाम से तथा बौद्ध ग्रंथों में मौदल के नाम से मुंगेर का उल्लेख मिलता है.
पाल वंश के शासक देव पाल के मुंगेर ताम्रपत्र में भी गोदा गिरी के नाम से इस स्थान का उल्लेख हुआ है. 1763 में बंगाल के तत्कालीन नवाब मीर कासिम ने अपनी राजधानी कोलकाता से मुंगेर स्थापित की थी.
मुंगेर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- मुंगेर का प्राचीन नाम मुद्गगिरि (Mudgagiri) माना जाता है.
- मुंगेर का उल्लेख महाभारत, रामायण, बौद्ध एवं जैन साहित्य सहित अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है.
- 1763 ई. में बंगाल के नवाब मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से स्थानांतरित कर मुंगेर बनाई थी.
- मुंगेर किला गंगा नदी के तट पर स्थित बिहार के सबसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक किलों में से एक है.
- मुंगेर स्थित बिहार स्कूल ऑफ योग (Bihar School of Yoga) की स्थापना 1963 में स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने की थी. यह विश्व के प्रमुख योग संस्थानों में गिना जाता है.
- सीताकुंड मुंगेर का प्रसिद्ध गर्म जलस्रोत है, जिसका धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व है.
- मुंगेर जिला गंगा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है और ऐतिहासिक रूप से व्यापार एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है.
- मुंगेर लंबे समय से आग्नेयास्त्र (Firearms) निर्माण उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है.
- मुंगेर में प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन तथा विभिन्न योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
- ऐतिहासिक धरोहर, योग परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण मुंगेर बिहार के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक एवं स्वास्थ्य पर्यटन स्थलों में गिना जाता है.
बिहारशरीफ (BiharSharif)
नालंदा जिले के मुख्यालय बिहार शरीफ में स्थित पीर पहाड़ी पर हजरत मलिक और शेख मखदूम शाह सरफुद्दीन की बड़ी दरगाह है. इसी के साथ हजरत बदरुद्दीन की छोटी दरगाह, जामा मस्जिद एवं मलिक इब्राहिम बाया का मकबरा भी स्थित है. यहां पर प्रतिवर्ष मेला का आयोजन किया जाता है.
बिहारशरीफ से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- बिहारशरीफ नालंदा जिले का मुख्यालय तथा बिहार के प्रमुख सूफी तीर्थस्थलों में से एक है.
- मध्यकाल में बिहारशरीफ बिहार सूबे की राजधानी भी रहा था.
- यहां स्थित बड़ी दरगाह सूफी संत मखदूम शेख शरफुद्दीन याहिया मनेरी (मखदूम-ए-जहाँ) की दरगाह है, जहां सभी धर्मों के लोग श्रद्धा व्यक्त करने आते हैं.
- छोटी दरगाह का निर्माण 16वीं शताब्दी में इब्राहिम बाया द्वारा कराया गया था और यह अपनी अफगानी स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है.
- बड़ी दरगाह और छोटी दरगाह बिहार की प्रमुख इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती हैं.
- प्रतिवर्ष उर्स के अवसर पर बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु बिहारशरीफ पहुंचते हैं.
- बिहारशरीफ, नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष तथा राजगीर के निकट होने के कारण धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है.
- यहां स्थित जामा मस्जिद और अन्य मध्यकालीन स्मारक इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं.
- बिहारशरीफ बौद्ध, जैन, हिंदू और सूफी परंपराओं के संगम का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
- धार्मिक सहिष्णुता, सूफी परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर के कारण बिहारशरीफ बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है.
सासाराम (Sasaram)
बिहार के सासाराम जिले में स्थित शेर शाह सूरी का मकबरा भारत के सबसे प्रभावशाली मकबरों में से एक है. इसे “बिहार का ताजमहल” भी कहा जाता है. यह मकबरा शेर शाह सूरी को समर्पित है और इसका निर्माण 1540-1545 के बीच हुआ था. लाल पत्थर से निर्मित और इसमें जटिल नक्काशी से लैस यह मकबरा इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह 122 फीट ऊंचा है और इसमें सुंदर गुंबद, मेहराब, स्तंभ, मीनार, छतरियां जैसी शानदार विशेषताएं हैं, जो इसे एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर बनाती हैं.
सासाराम सम्राट अशोक के एक शिलालेख (तेरह लघु शिलालेखों में से एक) के लिए भी प्रसिद्ध है, जो चंदन शहीद के पास कैमूर पहाड़ी की एक छोटी गुफा में स्थित है. यह शिलालेख सासाराम के पास कैमूर रेंज के टर्मिनल स्पर के शीर्ष के पास स्थित है.

सासाराम के रोहतासगढ़ में शेरशाह सूरी का किला भी स्थित है. इस किले का इतिहास 7वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व का है. किंवदंती है कि राजा हरिश्चंद्र ने अपने पुत्र रोहित के नाम पर इसे बनाया था. इस परिसर में चुरासन मंदिर, गणेश मंदिर, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम और सदियों पुरानी कई अन्य संरचनाएं हैं. मुग़ल बादशाह अकबर के शासनकाल के दौरान बिहार और बंगाल के राज्यपाल, राजा मान सिंह का मुख्यालय यही किला था. इस किले को वर्तमान रूप में शेरशाह सूरी द्वारा उस समय बनवाया गया था, जब हुमायूँ को हिंदुस्तान से निर्वासित किया गया था.
सासाराम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- सासाराम बिहार के रोहतास जिले का मुख्यालय है और अफगान शासक शेरशाह सूरी की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है.
- शेरशाह सूरी का मकबरा एक विशाल कृत्रिम जलाशय के मध्य निर्मित है तथा इसे इंडो-अफगान वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है.
- शेरशाह सूरी के शासनकाल में निर्मित ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) के विकास ने सासाराम को महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बनाया.
- सासाराम के निकट स्थित रोहतासगढ़ किला भारत के सबसे विशाल पहाड़ी किलों में से एक है और इसकी सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत मजबूत मानी जाती थी.
- रोहतासगढ़ किला को वर्ष 2024 में यूनेस्को की विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage) की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया.
- सासाराम के समीप कैमूर पर्वतमाला और तेलहर कुंड जलप्रपात प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख आकर्षण हैं.
- सासाराम में स्थित अशोक का लघु शिलालेख सम्राट अशोक के प्रारंभिक अभिलेखों में से एक माना जाता है और यह मौर्यकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है.
- शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में रुपया (Rupee) को मानकीकृत मुद्रा के रूप में प्रचलित किया तथा डाक एवं सड़क व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए.
- सासाराम में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक शेरशाह सूरी का मकबरा, रोहतासगढ़ किला तथा अन्य ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण करने आते हैं.
- ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व के कारण सासाराम बिहार के प्रमुख विरासत (Heritage) पर्यटन स्थलों में गिना जाता है.



