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This Section covers India’s actual constitutional/governmental machinery, institutions, rights, laws, and applied civic/society issues.

लोकसभा अध्यक्ष का चयन, कार्य और शक्तियां | Chairperson of Loksabha | Loksabha President | Sabhapati |Pithasin Ahikari
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लोकसभा अध्यक्ष का चयन, कार्य और शक्तियां 

लोकसभा अध्यक्ष; संसद के निचले सदन (लोकसभा) का सर्वोच्च प्राधिकारी और अध्यक्षीय अधिकारी होता है. लोकसभा के सदस्यों में से ही अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन होता है, जिनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है. किंतु वे समय से पूर्व भी त्यागपत्र दे सकते हैं अथवा दो तिहाई मत से पारित प्रस्ताव द्वारा उन्हें हटाया […]

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भारत के संविधान में उच्च न्यायालयों का प्रावधान | Provision of High Courts in the Constitution of India
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भारतीय संविधान में उच्च न्यायालय का प्रावधान और शक्तियां (अनु. 214-232)

भारत के संविधान में उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) का प्रावधान भी किया गया है. भारतीय न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च अदालत के बाद इन्हीं अदालतों का वरीयता दिया जाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 से 232 तक उच्च न्यायालयों से संबंधित प्रावधान हैं. संक्षेप में, ये अनुच्छेद भारतीय न्यायिक प्रणाली में उच्च न्यायालयों की भूमिका,

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सर्वोच्च न्यायालय का गठन, क्षेत्राधिकार, कॉलेजियम प्रणाली और अन्य तथ्य
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सर्वोच्च न्यायालय का गठन, क्षेत्राधिकार, कॉलेजियम प्रणाली और अन्य तथ्य

आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का गठन, शक्तियां एवं कार्य, न्यायाधीशों की नियुक्ति, शपथ, योग्यताएं, आयु सीमा, महाभियोग, वेतन व भत्ते एवं अन्य तथ्यों के बारे में जानेंगे. सर्वोच्च न्यायालय के गठन (Formation of Supreme Court) भारतीय संविधान के भाग V के अध्याय 4 के तहत सर्वोच्च न्यायालय स्थापित किया गया

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भारत के राष्ट्रपति: संवैधानिक स्थिति, शक्तियाँ और भूमिका
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भारत के राष्ट्रपति: संवैधानिक स्थिति, शक्तियाँ और भूमिका

भारत के राष्ट्रपति, भारतीय गणराज्य का संवैधानिक (De Jure) प्रमुख होता है. राष्ट्रपति नाममात्र का कार्यकारी प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्तियाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं. यह लेख भारत के राष्ट्रपति से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है, जिसमें उनकी संवैधानिक स्थिति, चुनाव प्रक्रिया, शक्तियाँ, मंत्रिपरिषद के

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लोकसभा का गठन, सदस्य, कार्य व शक्तियां
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लोकसभा का गठन, सदस्य, कार्य व शक्तियां

भारतीय संसद के तीन अंग राष्ट्रपति, राज्यसभा एवं लोकसभा टॉपिक के अंतर्गत आज हम लोकसभा के कार्य एवं शक्तियां, इसके सदस्य एवं सदस्यों के निर्वाचन, कार्य और शक्तियां जैसे विषयों को जानेंगे. हम लोकसभा से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न इत्यादि विषयों पर यह लेख प्रस्तुत कर रहे हैं; जो निम्नलिखित इस प्रकार से

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राज्यसभा का गठन, शक्तियां एवं कार्य
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राज्यसभा का गठन, शक्तियां एवं कार्य

भारत में केंद्रीय व्यवस्थापिका को ‘संसद’ के नाम से जाना जाता है, जिसका गठन राष्ट्रपति, राज्यसभा एवं लोकसभा से मिलकर होता है (अनुच्छेद 79). इन्हीं तीन अंगों में से एक प्रमुख अंग ‘राज्यसभा’ भी है. इसे उच्च सदन भी कहा जाता है. आज हम राज्यसभा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को जानेंगे; जैसे- राज्य सभा के

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भारतीय संसद से संबंधित अनुच्छेदों (77 से 117) का संक्षिप्त विवरण
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भारतीय संसद से संबंधित अनुच्छेदों (77 से 122) का संक्षिप्त विवरण

भारत के संविधान के भाग V में संघ सरकार के कामकाज के लिए प्रावधान हैं. एक तरह से यह भारतीय संसद का महत्वपूर्ण स्तम्भ है. यह भाग संघ स्तर पर सरकार की संसदीय प्रणाली, स्वतंत्र न्यायपालिका और शक्तियों का प्रभावी पृथक्करण स्थापित करता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 77 से 122 तक, केंद्र सरकार के

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प्रधानमंत्री से जुड़े सामान्य ज्ञान, कार्यकाल, शपथ, पदत्याग, भारत का प्रधानमंत्री, नियुक्ति, कार्य और शक्तियाँ
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भारत का प्रधानमंत्री, नियुक्ति, कार्य और शक्तियाँ

भारत का प्रधानमंत्री, भारतीय लोकतंत्र और शासन व्यवस्था का एक केंद्रीय स्तंभ है. भारत के संविधान के तहत, प्रधानमंत्री (PM) कार्यपालिका का प्रमुख होता है. वह सरकार के वास्तविक कार्यकारी नेतृत्व का प्रतीक है. वह राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच समन्वयक की भूमिका निभाता है. PM ही केंद्र सरकार की नीतियों और निर्णयों का नेतृत्व

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जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 का महत्व और प्रासंगिकता
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जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का महत्व और प्रासंगिकता 

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA, 1951) भारतीय चुनावी लोकतंत्र की आधारशिला है. यह संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के संचालन के लिए एक विस्तृत कानूनी ढाँचा प्रदान करता है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 327 के तहत इसे बनाया गया है.  यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से 329 के प्रावधानों का पूरक

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आपातकालीन प्रावधान: अनुच्छेद, जरुरत और महत्व
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आपातकालीन प्रावधान: अनुच्छेद, जरुरत और महत्व

भारतीय संविधान निर्माताओं ने ऐतिहासिक अनुभवों और वैश्विक घटनाओं से सीख ली. इसलिए, उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन प्रावधान जोड़े. इसके कारण प्रशासनिक तंत्र के विफल होने पर, भारतीय संघीय ढाँचे का एकात्मक प्रणाली में परिवर्तित होने की क्षमता है. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे अद्वितीय बताया है.

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