Civics

This Section covers India’s actual constitutional/governmental machinery, institutions, rights, laws, and applied civic/society issues.

समलैंगिक विवाह क्या है? - समलैंगिकता, पक्ष, विपक्ष और कानून
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समलैंगिक विवाह और समलैंगिकता

17 अक्टूबर 2023 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने 4-1 के बहुमत से याचिका के खिलाफ फैसला सुनाया और इसे वैधता प्रदान करने से इंकार कर दिया. अदालत के इस फैसले ने एलजीबीटीक्यूआईए+ (LGBTQIAA+) समुदाय को निराश किया […]

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एक राष्ट्र, एक चुनाव की संवैधानिक चुनौतियाँ, फायदे और नुकसान
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एक राष्ट्र, एक चुनाव की चुनौतियाँ

केंद्र सरकार में 2 सितम्बर 2023 को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव‘ सिद्धांत को अमलीजामा पहनाने के शुरूआती कदम के रूप में, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद के अध्यक्षता में एक आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है. इसके अन्य सात सदस्यों में केंद्र सरकार में गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, पूर्व

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पत्रकारिता का लोकतंत्र में योगदान और भारतीय मीडिया
Civics Polity

पत्रकारिता का लोकतंत्र में योगदान और भारतीय मीडिया

‘मीडिया‘ या ‘पत्रकारिता‘ को लोकतंत्र का चौथा खम्भा कहा जाता है. इसलिए इसका निष्पक्ष और स्वतंत्र होने निहायत जरुरी है. लोकतंत्र में कई समूह होते है. एक अत्यधिक अमीरों का समूह, जिनमें सत्ता को अपने अनुकूल मोड़ने का क्षमता होता है; दुसरा आम जनता, जो सत्ता तक अपनी बात पहुंचाकर सरकार के नीतियों को अपने

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बिहार में जातिगत सर्वेक्षण की जटिलताएँ और प्रभाव
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बिहार की जातिगत सर्वेक्षण

बिहार में जातिगत सर्वेक्षण या जातीय जनगणना अपने आखिरी पड़ाव पर है. यह एक ऐसा मुद्दा है जिसने राज्य को कई प्रकार से प्रभावित किया है. राज्य विधानमंडल में जातिगत सर्वेक्षण करवाने का फैसला पहली बार फ़रवरी 2019 में सर्वसम्मति से लिया गया था. उस वक्त राज्य विधानमंडल में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया

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जब संविधान सभा के एक सत्र में कुल 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए
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जब संविधान सभा के एक सत्र में कुल 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए

 देश के आजाद होने से पहले ही संविधान बनने का कार्य आरम्भ हो चुकी थी. सितम्बर, 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी (कंजर्वेटिव पार्टी को हराकर) सत्ता में आई. इस सरकार ने वर्ष 1946 में कैबिनेट मिशन भारत भेजी थी. कैबिनेट मिशन के द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों के अनुसार भारतीय संविधान सभा का गठन किया

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संघवाद और भारत
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भारत में संघवाद, इसके चरण, प्रकार और विशेषताएं

भारतीय संविधान में संघवाद की पुष्टि नहीं की गई है. हालाँकि, संविधान के भाग एक में वर्णित अनुच्छेद एक में इस ”राज्यों का संघ” के रूप में परिभाषित किया गया है. इससे भारतीय शासन-प्रणाली का संघवाद से प्रेरित होना साबित होता है. संविधान विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय संविधान में संघवाद के साथ-साथ एकात्मवाद का भी

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भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं, निर्माण का इतिहास और प्रस्तावना (Making of Constitution in India explained for UPSC Notes in Hindi free download)
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भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं, निर्माण का इतिहास और प्रस्तावना

भारतीय संविधान मौलिक नियमों का वह संग्रह है जो सरकार के विभिन्न अंगों के रुपरेखा, संरचना, अधिकार क्षेत्रों व उत्तरदायित्वों का निर्धारण करती है. इसका निर्माण ब्रिटिश सत्ता से आजादी मिलने पर संविधान सभा द्वारा किया गया था. संविधान से तात्पर्य (सम+विधान) उन मूल नियमों के संग्रह है, जिससे किसी राज्य या संगठन का अभिशासन

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राज्यपाल की नियुक्ति, अधिकार, शक्तियां; व पद से जुड़े विवाद
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राज्यपाल और उनके अधिकार

भारत एक राज्यों का संघ है. अर्थात हमारे देश को प्रशासनिक सुविधा के दृष्टि से केंद्र व राज्य सरकारों में विभाजित किया गया है. हमारे देश के केंद्र में राष्ट्रपति को सर्वोच्च दर्जा प्राप्त है, कुछ उसी तरह का दर्जा राज्य में राज्यपाल की है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 तक राज्यपाल से

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लोकतंत्र क्या है – इसके प्रकार, महत्व और विशेषताएं | Democracy its types threats importance features in Hindi by Piyadassi | प्रजातन्त्र या जनतंत्र का अवधारणा और सिद्धांत
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लोकतंत्र क्या है? प्रकार, सिद्धांत, महत्व, विशेषताएँ व गुण-दोष

लोकतंत्र अंग्रेजी शब्द डेमोक्रेसी (Democracy) का हिंदी रूपांतरण हैं. इसे प्रजातंत्र भी कहा जाता है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत के नागरिक होने के कारण आप इस शब्द से भलीभांति वाकिफ होंगे. आज के समय वैश्विक प्रशासन और राजनीति में लोकतंत्र का काफी महत्वपूर्ण स्थान है. कारण हैं- सभी कोई सत्ता में भागीदारी चाहते

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मौलिक अधिकार और इसका इतिहास क्या है?
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मौलिक अधिकार और इसका इतिहास

आधुनिक शासन पद्धति का सबसे प्रमुख अवयव मौलिक अधिकार है. किसी समय सिर्फ राजा या निरंकुश शासक को असीमित अधिकार प्राप्त होते थे, जनता को न के बराबर अधिकार मिलते थे. लेकिन पुनर्जागरण के दौर में शासक द्वारा जनता को कई अधिकार प्राप्त हुए. यहीं से मौलिक अधिकार के संकल्पना का विकास आरम्भ हुआ. आज

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