बिहार के 10 प्रमुख झीलें (10 Important Lakes of Bihar)

जल से भरे वह गहरे भू – भाग जो चारों तरफ से भूमि से घिरा हो, उसे झील (Lake) कहते हैं. ऐसे जलमग्न भूमि सामान्यतः आर्द्र-भूमि (Wet Land) कहलाते हैं. बिहार में ऐसे झीलों को स्थानीय भाषा में ताल, चौर, मन, दह या बिल (विशेषकर पूर्वी बिहार में) आदि नामों से भी जाना जाता है. ये झील मछली पालन, सिंचाई, पक्षी विहार, बाढ़ नियंत्रण तथा पर्यटन के लिए उपयोग किए जाते है.

बिहार के उत्तरी मैदानों में गंगा, बूढ़ी गंडक, कोसी तथा महानंदा आदि नदियों से अनेक प्राकृतिक झीलों का निर्माण हुआ है. क्योंकि मैदानी क्षेत्रों में मंद ढाल के कारण नदियों का वेग अत्यंत धीमी हो जाता है जिसके फलस्वरूप नदियां अपने साथ बहाकर ले गए अवसादो का परिवहन करने में असमर्थ हो जाता है. वे अवसाद जमा होकर एक झील का रूप ले लेता है.

बिहार की प्रमुख झीलें (Major Lake of Bihar)

आइए जानते हैं बिहार के प्रमुख झीलें कौन कौन हैं. हम इस लेख में बिहार के पांच प्रमुख झीलें को चर्चा करेंगे.

  1. कांवर झील – बेगूसराय
  2. कुशेश्वरस्थान झील – दरभंगा
  3. गोगाबिल झील – कटिहार
  4. सिमरी बख्तियारपुर झील – सहरसा
  5. जगतपुर झील – भागलपुर
  6. अनुपम झील – कैमूर
  7. घोड़ा कटोरा झील – नालंदा
  8. मुचालिंडा झील – गया
  9. सरैया मन झील – पश्चिम चंपारण
  10. नागी झील – जमुई

कांवर झील – Kanwar Lake

  • कांवर झील बिहार राज्य के बेगूसराय जिले के मझोला गांव में स्थित है. इस झील को बिहार सरकार ने 1984 ई. में पक्षी विहार का दर्जा दिया था, जिसकी क्षेत्रफल 16 वर्ग किलोमीटर है.
  • कांवर झील को भारत का 39 वां रामसर साइट घोषित किया गया है. जो बिहार का पहला रामसर है. यह झील एशिया का सबसे बड़ी गोखुर झील है.
  • इस झील निर्माण बूंदी गंडक नदी से हुआ है. इस झील में लेरिसिलता, हाइड्रा, पोटोमोगेंटन, वेल्सनेरिया, निंफसा, मिंफोलोड्स, वेटलवरिया तथा सरपस आदि प्रमुख वनस्पतियां पाई जाती हैं. 
  • कांवर झील में सर्दियों के दिनों में साइबेरिया के प्रवासी पक्षी आते हैं. यहां पर शोधकर्ता के लिए एक Bird Banding Station की स्थापना की गई है. इसे संरक्षित क्षेत्र भी घोषित किया गया है.

कुशेश्वरस्थान झील – Kusheshwarsthan Lake

  • कुशेश्वरस्थान झील बिहार के दरभंगा के कुशेश्वरस्थान प्रखंड में  स्थित है. इस झील को 1972 ई. में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था. इस झील में सर्दी के दिनों में पेलिकन डालमटिया (Pelican Dalmatia) तथा साइबेरियन क्रेन (Siberian Cranes) नामक प्रवासी पक्षी निवास करती है.
  • कुशेश्वरस्थान झील का क्षेत्रफल सर्दी के दिनों में 20 किलोमीटर तथा वर्षा के दिनों में 100 किलोमीटर तक हो जाता है. वर्षा के दिनों में कमला और करेह आदि नदियों के जल एकत्रित होनेेे के कारण इसका विस्तार हो जाता है. 
  • कुशेश्वरस्थान झील जैव विविधता का दुर्लभ उदाहरण होनेेे के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी है. साथ ही साथ यह मछली पालन एवं व्यापार का एक बड़ा केंद्र भी है.

गोगाबिल झील – Gogabil Lake

  • गोगाबिल झील को घोघा चाप या घोघा झील भी कहते हैं. यह झील बिहार राज्य के कटिहार जिले के मनिहारी में स्थित है. इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 5 वर्ग किलोमीटर है. 
  • यह झील बिहार का 15 वां आरक्षित क्षेत्र एवं पहला समुदायिक अभ्यारण भी है.
  • इस झील को मानसूनी वर्षा के साथ-साथ महानंदा नदी से भी जल प्राप्त होता है. गोगाबिल झील प्रवासी पक्षियों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां हर वर्ष हजारों की तादाद में कैप्शियन सागर और साइबेरियाई क्षेत्र से लगभग 300 प्रजाति के पक्षी प्रवास के लिए आते हैं.

सिमरी बख्तियारपुर झील – Simari Bakhtiyarpur Lake

  • सिमरी बख्तियारपुर झील बिहार राज्य के सहरसा से 25 किलोमीटर की दूरी पर सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड में स्थित है. झील का निर्माण सरदिया, जमुनिया, कुमिबी तथा गोबरा आदि जिलों के मिलने से हुआ है.
  • सिमरिया बख्तियारपुर झील की आकृति घोड़े की नाल की तरह है. इस झील के दक्षिण – पश्चिम में कावर झील तथा उत्तर – पश्चिम में कुशेश्वरस्थान झील है.

जगतपुर झील – Jagatpur Lake

  • जगतपुर झील राज्य के भागलपुर जिले में स्थित है इसका क्षेत्रफल 400 हेक्टेयर में है जो गर्मी के मौसम में सूख कर 50 हेक्टेयर तक रह जाता है.
  • जगतपुर झील में स्थानीय लोगों एवं सरकार की सहायता से देशी और विदेशी प्रजातियों के पक्षियों का संरक्षण किया जा रहा है.

अनुपम झील – Anupam Lake

  • अनुपम झील बिहार के कैमूर जिले में स्थित कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के निकट एक प्राकृतिक झील है. यह चारों ओर से विंध्य पर्वत की पहाड़ियों एवं घने वनों से घिरी हुई है.
  • यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण तथा स्वच्छ जल के लिए प्रसिद्ध है. वर्षा ऋतु में इसका जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे इसका आकर्षण और भी बढ़ जाता है.
  • झील के आसपास हिरण, नीलगाय, मोर तथा अनेक प्रकार के स्थानीय एवं प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं. इस कारण यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
  • कैमूर क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों एवं प्रकृति प्रेमियों के लिए यह झील प्रमुख आकर्षण का केंद्र है तथा इको-टूरिज्म की दृष्टि से इसका विशेष महत्व है.

घोड़ा कटोरा झील – Ghora Katora Lake

  • घोड़ा कटोरा झील बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के निकट स्थित एक प्राकृतिक झील है. यह पाँचों ओर से पहाड़ियों एवं वनों से घिरी हुई है.
  • झील का नाम इसकी घोड़े की नाल (Horse Shoe) जैसी आकृति के कारण घोड़ा कटोरा पड़ा है. यहां मोटर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होने से इसका प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित बना हुआ है.
  • झील के मध्य में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जो इसे धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है.
  • घोड़ा कटोरा झील राजगीर आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है. यहां नौका विहार की भी सुविधा उपलब्ध है.

मुचालिंडा झील – Muchalinda Lake

  • मुचालिंडा झील बिहार के गया जिले के बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर के समीप स्थित एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक झील है.
  • बौद्ध परंपरा के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति के बाद वर्षा एवं तूफान से भगवान बुद्ध की रक्षा मुचालिंडा नागराज ने अपने फन फैलाकर की थी. इसी घटना की स्मृति में इस झील का नाम मुचालिंडा झील रखा गया.
  • झील के मध्य में भगवान बुद्ध एवं नागराज मुचालिंडा की प्रतिमा स्थापित है, जो देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
  • महाबोधि मंदिर परिसर का अभिन्न भाग होने के कारण यह झील धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है.

सरैया मन झील – Saraiya Man Lake

  • सरैया मन झील बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया क्षेत्र में स्थित एक प्राकृतिक गोखुर (ऑक्सबो) झील है. इसका निर्माण गंडक नदी की पुरानी धारा के कटाव एवं मार्ग परिवर्तन के फलस्वरूप हुआ है.
  • यह झील वर्षभर जल एवं आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा अनेक जलीय वनस्पतियों एवं मछलियों का प्राकृतिक आवास है.
  • सर्दियों के मौसम में यहां विभिन्न प्रकार के स्थानीय एवं प्रवासी पक्षी आते हैं, जिससे यह पक्षी प्रेमियों एवं शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती है.
  • सरैया मन झील स्थानीय मत्स्य पालन, सिंचाई तथा जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों में गिनी जाती है.

नागी झील – Nagi Lake

  • नागी झील बिहार के जमुई जिले में झाझा अनुमंडल के समीप स्थित एक महत्वपूर्ण मानव निर्मित जलाशय (Reservoir) है. इसका निर्माण सिंचाई एवं जल संरक्षण के उद्देश्य से नागी बाँध के निर्माण के साथ किया गया था.
  • इस झील के आसपास का क्षेत्र वर्ष 1984 में नागी पक्षी अभयारण्य (Nagi Bird Sanctuary) के रूप में अधिसूचित किया गया. यह बिहार के प्रमुख पक्षी अभयारण्यों में से एक है.
  • शीत ऋतु के दौरान यहाँ साइबेरिया, मध्य एशिया तथा यूरोप से आने वाले अनेक प्रवासी पक्षी, जैसे बार-हेडेड गूज (Bar-headed Goose), नॉर्दर्न पिंटेल (Northern Pintail), कॉमन टील (Common Teal) तथा अन्य जलपक्षी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं.
  • नागी झील जैव विविधता संरक्षण, पक्षी अवलोकन (Bird Watching), मत्स्य पालन तथा प्रकृति पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. वर्ष 2022 में इसे रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar Site) का दर्जा प्रदान किया गया, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक महत्ता को मान्यता मिली.

इन्फोग्राफिक: बिहार की प्रमुख झीलें

Major Lakes of Bihar Map Infographic Hindi

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • बिहार का पहला रामसर स्थल — काँवर झील
  • एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील — काँवर झील
  • बिहार का पहला सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र — गोगाबिल
  • बिहार में सबसे अधिक रामसर स्थल वाला जिला — जमुई
  • राजगीर की प्रसिद्ध झील — घोड़ा कटोरा
  • भगवान बुद्ध से संबंधित झील — मुचालिंडा
  • कोसी बेसिन की प्रमुख झील — सिमरी बख्तियारपुर
  • उत्तर बिहार में अधिकांश प्राकृतिक झीलें गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी तथा महानंदा नदियों द्वारा निर्मित गोखुर झीलें हैं.
  • दक्षिण बिहार में अधिकांश झीलें बाँधों, जलाशयों अथवा पर्वतीय अवसादों से निर्मित हैं, जैसे—नागी झील, नकटी झील तथा घोड़ा कटोरा.
  • बिहार में लगभग 6,000 से अधिक आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) पाई जाती हैं.
  • राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 4–5% भाग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्द्रभूमियों से प्रभावित है.
  • बिहार की अधिकांश प्राकृतिक झीलें गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित गोखुर (Oxbow) झीलें हैं.
  • राज्य की आर्द्रभूमियाँ सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसके कारण प्रत्येक वर्ष हजारों प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं.
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मुख्य बिंदु
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