फोटोनिक चिप क्या है? कार्यप्रणाली, उपयोग, लाभ, चुनौतियाँ और भारत

फोटोनिक चिप (Photonic Chip) आधुनिक अर्धचालक तकनीक का एक उभरता हुआ क्षेत्र है. इसमें सूचना के संचरण और कुछ प्रकार के प्रसंस्करण के लिए प्रकाशीय संकेतों का उपयोग किया जाता है. इसके विपरीत, पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक चिप में मुख्य रूप से विद्युत संकेतों का उपयोग होता है.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशाल डेटा केंद्रों, उच्च क्षमता वाली गणना, 6जी संचार और क्वांटम तकनीक के विकास के साथ फोटोनिक चिप का महत्व बढ़ रहा है. यह तकनीक विशेष रूप से बहुत अधिक मात्रा में सूचना के तेज और कुशल संचरण में उपयोगी हो सकती है.

फोटोनिक चिप को इलेक्ट्रॉनिक चिप का पूर्ण विकल्प मानना अभी उचित नहीं है. वर्तमान में दोनों तकनीकों का संयुक्त उपयोग अधिक व्यावहारिक है. इलेक्ट्रॉनिक घटक नियंत्रण और तर्क संबंधी कार्यों के लिए उपयोगी हैं. वहीं, प्रकाशीय घटक उच्च गति वाले संचार और कुछ विशेष प्रकार की गणनाओं में लाभ दे सकते हैं.

भारत में भी इस क्षेत्र में अनुसंधान तेजी से बढ़ रहा है. अप्रैल 2026 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में स्वदेशी सिलिकॉन फोटोनिक्स से संबंधित तकनीकी सुविधाओं का शुभारंभ किया गया. इससे भारत में फोटोनिक चिप के डिजाइन, परीक्षण और विकास की क्षमता को बढ़ावा मिलने की संभावना है.

इस लेख में हम जानेंगे

फोटोनिक चिप क्या है?

फोटोनिक चिप एक ऐसा एकीकृत परिपथ है, जिसमें प्रकाश को नियंत्रित करके सूचना का संचरण, रूपांतरण और कुछ विशेष प्रकार का प्रसंस्करण किया जाता है. सरल शब्दों में, इलेक्ट्रॉनिक चिप में विद्युत संकेतों का उपयोग होता है. फोटोनिक चिप में प्रकाशीय संकेत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

फोटोनिक तकनीक का प्रमुख लाभ केवल प्रकाश की गति नहीं है. इसकी उपयोगिता उच्च बैंडविड्थ, प्रकाशीय संकेतों के समानांतर संचरण तथा कुछ परिस्थितियों में कम ऊर्जा-हानि में भी है. विशेष रूप से बड़ी मात्रा में डेटा के संचरण में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है. इसी कारण इसका महत्व आधुनिक संचार और कंप्यूटिंग व्यवस्था में बढ़ रहा है.

फोटोनिक चिप कैसे काम करती है?

फोटोनिक चिप में कई प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक घटक मिलकर काम करते हैं. प्रकाश को चिप के भीतर एक निश्चित मार्ग से ले जाने के लिए प्रकाशीय मार्गदर्शक (Waveguide) का उपयोग किया जाता है. प्रकाशीय संकेत में सूचना को समाहित करने के लिए प्रकाशीय मॉड्यूलेटर (Optical Modulator) का उपयोग किया जाता है. प्रकाशग्राही (Photodetector) प्रकाशीय संकेत को विद्युत संकेत में बदल सकता है.

लेजर प्रकाश का स्रोत उपलब्ध कराता है. प्रकाशीय युग्मक (Optical Coupler) प्रकाश को चिप और प्रकाशीय तंतु के बीच जोड़ने में सहायता करता है. इस प्रकार एक सामान्य प्रक्रिया को इस रूप में समझा जा सकता है—

सूचना → प्रकाशीय संकेत में रूपांतरण → चिप के भीतर प्रकाश का संचरण या प्रसंस्करण → प्रकाशीय संकेत का संचार → आवश्यकता होने पर विद्युत संकेत में रूपांतरण

इस व्यवस्था में प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक दोनों घटक साथ काम कर सकते हैं. इसलिए आधुनिक फोटोनिक प्रणालियाँ केवल प्रकाश पर आधारित नहीं होतीं.

फोटोनिक चिप में प्रयुक्त सामग्री

फोटोनिक चिप के निर्माण में अलग-अलग प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. सामग्री का चुनाव उसके प्रकाशीय और विद्युत गुणों के आधार पर किया जाता है.

सिलिकॉन

सिलिकॉन फोटोनिक्स की प्रमुख सामग्रियों में से एक है. इसका एक बड़ा लाभ यह है कि अर्धचालक उद्योग में सिलिकॉन का पहले से व्यापक उपयोग होता है. इस कारण मौजूदा अर्धचालक निर्माण तकनीकों का लाभ उठाने की संभावना रहती है. सिलिकॉन का उपयोग मुख्य रूप से प्रकाशीय मार्गदर्शकों और अन्य निष्क्रिय प्रकाशीय घटकों के निर्माण में किया जाता है.

इंडियम फॉस्फाइड

इंडियम फॉस्फाइड (Indium Phosphide) सक्रिय प्रकाशीय घटकों के निर्माण में उपयोगी है. इससे लेजर, प्रकाशीय प्रवर्धक और प्रकाशग्राही जैसे घटक बनाए जा सकते हैं. इसका उपयोग विशेष रूप से प्रकाशीय संचार और संवेदन प्रणालियों में किया जाता है.

सिलिकॉन नाइट्राइड

सिलिकॉन नाइट्राइड (Silicon Nitride) में प्रकाशीय हानि कम हो सकती है. यह व्यापक प्रकाशीय वर्णक्रम में भी उपयोगी है. इस कारण इसका उपयोग संवेदन, वर्णक्रममापी तथा कुछ क्वांटम अनुप्रयोगों में किया जा सकता है.

लिथियम नायोबेट

लिथियम नायोबेट (Lithium Niobate) के विद्युत-प्रकाशीय गुण उत्कृष्ट होते हैं. इसलिए यह प्रकाशीय संकेतों के मॉड्यूलेशन में उपयोगी है.

अन्य सामग्री

विशेष अनुप्रयोगों के लिए हीरा, एल्युमिनियम नाइट्राइड और कुछ मिश्रित तथा बहुलक पदार्थों का भी उपयोग किया जा सकता है. इस प्रकार फोटोनिक चिप का विकास किसी एक सामग्री पर निर्भर नहीं है. अलग-अलग सामग्रियों के विशेष गुणों का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की प्रकाशीय प्रणालियाँ विकसित की जाती हैं.

फोटोनिक चिप के घटक
फोटोनिक चिप के घटक

इलेक्ट्रॉनिक और फोटोनिक चिप में अंतर

आधारइलेक्ट्रॉनिक चिपफोटोनिक चिप
सूचना का वाहकइलेक्ट्रॉनफोटॉन
संकेत का प्रकारविद्युत संकेतप्रकाशीय संकेत
प्रमुख माध्यमविद्युत परिपथप्रकाशीय मार्ग
डेटा संचरणविद्युत अंतर-संपर्कप्रकाशीय अंतर-संपर्क
बैंडविड्थप्रणाली पर निर्भरबहुत अधिक बैंडविड्थ की संभावना
समानांतर प्रसंस्करणप्रणाली की संरचना पर निर्भरकुछ कार्यों में अधिक संभावना
प्रमुख उपयोगसामान्य गणना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणसंचार, संवेदन और विशेष गणनाएँ
वर्तमान स्थितिव्यापक रूप से स्थापिततेजी से विकसित होती तकनीक

फोटोनिक चिप को इलेक्ट्रॉनिक चिप से हर क्षेत्र में बेहतर मानना सही नहीं होगा. दोनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है. वर्तमान में ऐसी प्रणालियाँ अधिक उपयोगी मानी जाती हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक और प्रकाशीय तकनीक साथ काम करती हैं.

प्रकाशीय अंतर-संपर्क और प्रकाशीय गणना

फोटोनिक तकनीक के दो महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं. पहला है प्रकाशीय अंतर-संपर्क. दूसरा है प्रकाशीय गणना.

प्रकाशीय अंतर-संपर्क

आधुनिक डेटा केंद्रों में विभिन्न सर्वरों, गणना इकाइयों और स्मृति इकाइयों के बीच बहुत अधिक मात्रा में डेटा का आदान-प्रदान होता है. विद्युत संकेतों के माध्यम से अधिक मात्रा में डेटा के संचरण में ऊर्जा खपत और ऊष्मा जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं. प्रकाशीय अंतर-संपर्क इन समस्याओं को कम करने का एक संभावित उपाय है. इसमें प्रकाश के माध्यम से सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है. इससे उच्च गति वाले डेटा संचरण में लाभ मिल सकता है.

प्रकाशीय गणना

प्रकाशीय गणना में प्रकाश का उपयोग केवल सूचना पहुँचाने के लिए नहीं किया जाता. कुछ प्रकार की गणनाओं में भी प्रकाश का उपयोग किया जाता है. कई प्रकाशीय प्रणालियाँ प्रकाश की समानांतर प्रकृति का लाभ उठा सकती हैं.

विशेष रूप से आव्यूह गुणन जैसी गणनाओं के लिए प्रकाशीय प्रणालियों पर अनुसंधान किया जा रहा है. यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उपयोगी हो सकता है. फिर भी प्रकाशीय गणना अभी सभी प्रकार की गणनाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक गणना का विकल्प नहीं है.

फोटोनिक चिप के प्रमुख उपयोग

1. डेटा केंद्र और मेघ संगणना

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण डेटा केंद्रों में सूचना का प्रवाह तेजी से बढ़ रहा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बड़े प्रारूपों में गणना इकाइयों के बीच बड़ी मात्रा में डेटा का आदान-प्रदान होता है. इस कारण तेज और ऊर्जा-कुशल अंतर-संपर्क की आवश्यकता बढ़ रही है. फोटोनिक चिप और प्रकाशीय अंतर-संपर्क इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता

कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बड़ी मात्रा में गणना करनी पड़ती है. तंत्रिका नेटवर्क में आव्यूह गुणन जैसी गणनाएँ बार-बार होती हैं. प्रकाश की समानांतर प्रकृति का उपयोग करके कुछ गणनाओं को अधिक तेजी से करने की संभावना है.

इसका महत्व केवल गति तक सीमित नहीं है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ बिजली की खपत भी बढ़ रही है. इसलिए कम ऊर्जा में अधिक गणना करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन रही है. फोटोनिक गणना इस दिशा में एक संभावित समाधान है. हालांकि, इसकी अपनी तकनीकी सीमाएँ भी हैं.

3. दूरसंचार

दूरसंचार में प्रकाश का उपयोग नया नहीं है. प्रकाशीय तंतु के माध्यम से आज बड़ी मात्रा में सूचना का संचरण किया जाता है. फोटोनिक चिप इस व्यवस्था को अधिक छोटे और एकीकृत उपकरणों में बदलने में सहायता कर सकती है. 6जी जैसी भावी संचार प्रणालियों में अधिक गति, अधिक क्षमता और कम विलंब की आवश्यकता होगी. ऐसी स्थिति में प्रकाशीय तकनीक की भूमिका बढ़ सकती है.

4. क्वांटम प्रौद्योगिकी

फोटोनिक्स और क्वांटम प्रौद्योगिकी के बीच घनिष्ठ संबंध है. प्रकाश कणों का उपयोग क्वांटम सूचना के वाहक के रूप में किया जा सकता है. प्रकाशीय क्वांटम बिट का उपयोग क्वांटम संचार और क्वांटम संगणना में किया जा सकता है. इसके अलावा सुरक्षित क्वांटम संचार, क्वांटम कुंजी वितरण और क्वांटम संवेदन में भी फोटोनिक तकनीक उपयोगी है.

भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत मध्यम स्तर के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. मिशन में विभिन्न तकनीकी माध्यमों के साथ प्रकाशीय तकनीक पर भी कार्य किया जा रहा है.

5. रक्षा और सामरिक क्षेत्र

फोटोनिक तकनीक का उपयोग सुरक्षित संचार, उन्नत संवेदक, निगरानी और दूरी मापन में किया जा सकता है. प्रकाश आधारित दूरी मापन तकनीक स्वचालित वाहनों और रक्षा प्रणालियों में उपयोगी हो सकती है. भविष्य में सुरक्षित उच्च गति संचार और उन्नत संवेदन प्रणालियों की आवश्यकता बढ़ने के साथ फोटोनिक्स का सामरिक महत्व भी बढ़ सकता है.

6. स्वास्थ्य क्षेत्र

प्रकाश की सहायता से जैविक पदार्थों की पहचान और विश्लेषण किया जा सकता है. इसलिए फोटोनिक चिप का उपयोग जैव-संवेदन, चिकित्सा परीक्षण और चिकित्सा चित्रण में किया जा सकता है. छोटे प्रकाशीय उपकरण भविष्य में कुछ चिकित्सकीय उपकरणों को अधिक पोर्टेबल और संवेदनशील बनाने में सहायता कर सकते हैं.

7. स्वचालित वाहन

स्वचालित वाहनों को अपने आसपास की वस्तुओं की दूरी और स्थिति का लगातार पता लगाना पड़ता है. प्रकाश आधारित दूरी मापन इस कार्य में महत्वपूर्ण है. फोटोनिक चिप ऐसी संवेदन प्रणालियों को छोटा और अधिक एकीकृत बनाने में सहायता कर सकती है.

सह-पैकेजित प्रकाशिकी

सह-पैकेजित प्रकाशिकी (Co-Packaged Optics) फोटोनिक तकनीक का एक उभरता हुआ क्षेत्र है. इसमें प्रकाशीय घटकों को गणना करने वाली चिप के बहुत निकट रखा जाता है. इसका उद्देश्य विद्युत संकेतों को अधिक दूरी तक ले जाने की आवश्यकता को कम करना है.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए उपयोग होने वाली उच्च क्षमता वाली गणना प्रणालियों में डेटा की मात्रा बहुत अधिक होती है. ऐसे में पारंपरिक विद्युत अंतर-संपर्कों के सामने ऊर्जा और बैंडविड्थ की चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं. सह-पैकेजित प्रकाशिकी इन चुनौतियों को कम करने का एक संभावित उपाय है.

फोटोनिक पैकेजिंग का महत्व

फोटोनिक चिप बनाना ही पर्याप्त नहीं है. चिप को प्रकाशीय तंतु और अन्य उपकरणों से जोड़ना भी आवश्यक है. इस प्रक्रिया को प्रकाशीय युग्मन कहा जाता है. इसके अलावा ताप प्रबंधन, प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक घटकों का एकीकरण तथा परीक्षण भी महत्वपूर्ण हैं.

इसलिए फोटोनिक तकनीक में पैकेजिंग का विशेष महत्व है. भविष्य में प्रतिस्पर्धा केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी. पैकेजिंग और परीक्षण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे. भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है. यदि देश चिप निर्माण के साथ पैकेजिंग और परीक्षण की घरेलू क्षमता विकसित करता है, तो अर्धचालक मूल्य शृंखला में उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है.

ऊर्जा-दक्षता और हरित संगणना

डेटा केंद्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ बिजली की खपत बढ़ रही है. इसके साथ शीतलन, जल उपयोग और कार्बन उत्सर्जन जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं. फोटोनिक अंतर-संपर्क कुछ परिस्थितियों में कम ऊर्जा में अधिक डेटा संचारित कर सकते हैं. इसी प्रकार कुछ प्रकाशीय गणनाएँ विशेष कार्यों को कम ऊर्जा में करने की क्षमता रखती हैं.

फिर भी फोटोनिक चिप को स्वतः पूर्ण रूप से पर्यावरण-अनुकूल तकनीक नहीं माना जाना चाहिए. लेजर, विद्युत-प्रकाशीय रूपांतरण, ताप नियंत्रण, निर्माण और पैकेजिंग में भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. इसलिए इसका वास्तविक पर्यावरणीय लाभ पूरी प्रणाली और उसके जीवन-चक्र पर निर्भर करता है.

अंतरिक्ष क्षेत्र में फोटोनिक्स

उपग्रहों के बीच प्रकाशीय संचार भविष्य की अंतरिक्ष संचार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है. पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से प्राप्त आँकड़ों की मात्रा लगातार बढ़ रही है. इसलिए अंतरिक्ष में अधिक गति से डेटा भेजने की आवश्यकता भी बढ़ रही है.

प्रकाशीय संचार बहुत अधिक मात्रा में डेटा को तेज गति से भेजने की संभावना प्रदान करता है. फोटोनिक चिप ऐसे उपकरणों को छोटा और अधिक एकीकृत बनाने में सहायता कर सकती है. भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए यह एक उभरता हुआ तकनीकी अवसर है.

भारत में फोटोनिक चिप का विकास

भारत में फोटोनिक चिप के विकास को अर्धचालक और गहन तकनीक के व्यापक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास की पहल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में सिलिकॉन फोटोनिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान किया जा रहा है. अप्रैल 2026 में यहाँ स्वदेशी सिलिकॉन फोटोनिक्स से संबंधित दो तकनीकी समाधानों का शुभारंभ किया गया. इनमें फोटोनिक परिपथों के डिजाइन के लिए प्रक्रिया डिजाइन किट और पैकेज किए गए प्रकाशीय परिपथों के परीक्षण के लिए स्वदेशी परीक्षण प्रणाली शामिल है.

इस प्रकार की सुविधाएँ शोधकर्ताओं और उद्योग को फोटोनिक चिप के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण में सहायता कर सकती हैं. यह भारत में फोटोनिक चिप के घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई. इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक प्रावधान किया गया. इस मिशन का उद्देश्य अर्धचालक उपकरणों और सामग्रियों के घरेलू विकास, भारतीय बौद्धिक संपदा, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन को बढ़ावा देना है.

जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के लिए ₹1.27 लाख करोड़ के कुल परिव्यय को मंजूरी दी. इसमें चिप डिजाइन, अर्धचालक उपकरण और सामग्री, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान तथा मानव संसाधन विकास पर जोर दिया गया है. यह फोटोनिक चिप के लिए भी महत्वपूर्ण है. इसका कारण यह है कि फोटोनिक तकनीक के विकास के लिए डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण की पूरी व्यवस्था आवश्यक है.

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

₹6,003.65 करोड़ की लागत वाले राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उद्देश्य भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी की क्षमता विकसित करना है. इसके अंतर्गत क्वांटम संगणना, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदन और क्वांटम सामग्री पर कार्य किया जा रहा है.

क्वांटम तकनीक में प्रकाशीय प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. इसलिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और फोटोनिक तकनीक के विकास के बीच भविष्य में अधिक तालमेल की संभावना है.

भारत के लिए अवसर

फोटोनिक चिप भारत के लिए केवल एक नई चिप तकनीक नहीं है. यह अर्धचालक, प्रकाशिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार और क्वांटम तकनीक के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है.

भारत के लिए इसके प्रमुख अवसर हैं. इनमें फोटोनिक चिप का डिजाइन, प्रकाशीय संचार, उन्नत पैकेजिंग, परीक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए विशेष गणना प्रणालियाँ, क्वांटम फोटोनिक्स, प्रकाशीय संवेदन तथा रक्षा संबंधी अनुप्रयोग शामिल हैं.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अनुसंधान संस्थानों में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रतिभा इस क्षेत्र के विकास का मजबूत आधार बन सकती है. यदि भारत केवल डिजाइन तक सीमित न रहकर निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण और प्रणाली एकीकरण की क्षमता भी विकसित करता है, तो देश फोटोनिक चिप की वैश्विक मूल्य शृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

फोटोनिक चिप की प्रमुख चुनौतियाँ

फोटोनिक तकनीक में अनेक संभावनाएँ हैं. फिर भी इसके सामने कई चुनौतियाँ हैं.

तकनीकी जटिलता

प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक घटकों को एक ही प्रणाली में कुशलतापूर्वक जोड़ना कठिन है. लेजर, मॉड्यूलेटर, प्रकाशग्राही, प्रकाशीय मार्ग और इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली को एक साथ कार्य करना पड़ता है.

निर्माण और परीक्षण सुविधाएँ

उन्नत फोटोनिक चिप के लिए विशेष निर्माण और परीक्षण सुविधाओं की आवश्यकता होती है. यदि घरेलू सुविधाएँ पर्याप्त विकसित नहीं होती हैं, तो विदेशी संस्थानों और निर्माण इकाइयों पर निर्भरता बढ़ सकती है.

कुशल मानव संसाधन

फोटोनिक्स एक बहुविषयी क्षेत्र है. इसमें प्रकाशिकी, भौतिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, अर्धचालक अभियांत्रिकी, पदार्थ विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान का ज्ञान आवश्यक है. इसलिए इस क्षेत्र में विशेष रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना आवश्यक होगा.

उच्च पूंजी लागत

फोटोनिक चिप के अनुसंधान, नमूना निर्माण, परीक्षण और व्यावसायिक उत्पादन में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता हो सकती है. अनुसंधान से व्यावसायिक उत्पाद तक पहुँचने में भी काफी समय लग सकता है.

पैकेजिंग की चुनौती

प्रकाश को चिप में पहुँचाना और उससे बाहर निकालना जटिल हो सकता है. प्रकाशीय युग्मन और ताप प्रबंधन भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं.

वैश्विक प्रतिस्पर्धा

अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में फोटोनिक तकनीक पर पहले से व्यापक अनुसंधान और औद्योगिक क्षमता मौजूद है. भारत को इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनने के लिए अनुसंधान के साथ-साथ बौद्धिक संपदा, निर्माण, पैकेजिंग और विशेष अनुप्रयोगों पर भी ध्यान देना होगा.

फोटोनिक चिप के लाभ

फोटोनिक चिप के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

  1. बहुत अधिक बैंडविड्थ की संभावना.
  2. उच्च गति वाले डेटा संचरण में उपयोगी.
  3. कुछ प्रकाशीय अंतर-संपर्कों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की संभावना.
  4. कुछ गणनाओं में समानांतर प्रसंस्करण की क्षमता.
  5. डेटा केंद्रों में उच्च गति वाले अंतर-संपर्क के लिए उपयोगी.
  6. प्रकाशीय संवेदन में उपयोगी.
  7. क्वांटम संचार और क्वांटम तकनीक में उपयोगी.
  8. 6जी जैसी भावी संचार प्रणालियों में संभावित उपयोग.
  9. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए विशेष गणना प्रणालियों में उपयोग की संभावना.
  10. अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में संभावित उपयोग.

फोटोनिक चिप की सीमाएँ

फोटोनिक चिप की कुछ सीमाएँ भी हैं. प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक घटकों का एकीकरण जटिल है. लेजर और विद्युत-प्रकाशीय रूपांतरण की आवश्यकता हो सकती है. पैकेजिंग और प्रकाशीय युग्मन भी कठिन हैं. हर प्रकार की गणना के लिए फोटोनिक तकनीक उपयुक्त नहीं है. कुछ कार्यों में इलेक्ट्रॉनिक तकनीक अभी अधिक प्रभावी है.

इसके अतिरिक्त, विशेष निर्माण और परीक्षण सुविधाओं की लागत भी अधिक हो सकती है. इसलिए निकट भविष्य में फोटोनिक और इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों के संयुक्त उपयोग की संभावना अधिक है.

निष्कर्ष

फोटोनिक चिप भविष्य की संगणना और अर्धचालक तकनीक का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है. इसकी प्रगति के साथ भारत के लिए इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने के नए अवसर खुलेंगे.

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